PMFBY में बड़ा बदलाव: अब सैटेलाइट डेटा से तय होगा फसल का नुकसान, जल्द मिलेगा क्लेम
अगर आपने भी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2026 (PMFBY) के तहत अपनी फसल बीमा करवा लिया है, तो यह खबर आपके लिए ही है। सरकार अब पुराने तरीकों को छोड़कर हाईटेक रास्ता अपना रही है। मकसद साफ है – फसल नुकसान का सही अंदाजा और जल्दी क्लेम। संसद में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने इसकी पूरी जानकारी दी है।
रामनाथ ठाकुर ने संसद में लिखित जवाब में बताया कि सरकार ने WINDS, YES-Tech, राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल (NCIP), DigiClaim Architecture और Crop Loss Assessment App (CLAP) जैसी डिजिटल तकनीकों को योजना में शामिल किया है।

दरअसल प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) को लेकर किसानों की सबसे बड़ी शिकायत रही है – क्लेम में देरी। सरकार अब इसी समस्या को जड़ से सुलझाने में जुटी है।
WINDS से मिलेगा गांव-गांव का मौसम डेटा
WINDS यानी Weather Information Network and Data System। यह नेटवर्क खेत के आसपास ही मौसम की पूरी जानकारी जुटाएगा। बारिश कितनी हुई, तापमान कैसा रहा – सब कुछ रिकॉर्ड होगा।
फिलहाल यह सात राज्यों में चल रहा है। असम, हिमाचल, केरल, ओडिशा, पुडुचेरी, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड शामिल हैं। 16,843 जगहों पर मंजूरी मिल चुकी है। इनमें से 892 जगहों पर उपकरण लग भी चुके हैं।
YS-Tech: अब अंदाजा नहीं, सैटेलाइट से सटीक हिसाब
2023 से एक और तकनीक जुड़ी – YS-Tech। यह रिमोट सेंसिंग के जरिए फसल का सही डेटा निकालती है। शुरुआत धान और बाजरा से हुई थी। अब सोयाबीन भी इसमें शामिल है।
सबसे अहम बात? सरकार ने इसे 30% वेटेज देना जरूरी कर दिया है। यानी नुकसान तय करते वक्त इस डेटा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
किस राज्य ने कितना भरोसा जताया
2025-26 में 12 राज्यों के 344 जिलों में YS-Tech लागू हुआ। मध्य प्रदेश ने तो इसे 100 प्रतिशत वेटेज दे दिया। महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश ने 50 प्रतिशत रखा। ओडिशा और कर्नाटक ने 40 प्रतिशत तय किया।
हर राज्य ने अपनी जरूरत के हिसाब से फैसला लिया है। वजह? स्थानीय फसल पैटर्न और पुराना अनुभव।
NCIP पोर्टल से खत्म हुई कागजी झंझट
राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल यानी NCIP अब पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन ले आया है। पंजीकरण, प्रीमियम जमा करना, क्लेम की राशि सीधे बैंक खाते में- सब कुछ यहीं से।
पहले किसानों को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे। अब ज्यादातर काम मोबाइल या कंप्यूटर से ही हो जाता है।
देरी हुई तो कंपनी को देना होगा 12% ब्याज

यह सबसे राहत वाली बात है। अगर बीमा कंपनी समय पर क्लेम नहीं देती, तो उसे 12% ब्याज के साथ भुगतान करना होगा। राज्य सरकार भी अगर अपना प्रीमियम हिस्सा देर से भेजती है, तो उस पर भी यही नियम लागू होगा।
केंद्र ने अपना हिस्सा राज्य के हिस्से से अलग भी कर दिया है। सीधा फायदा? किसान का क्लेम अब किसी और की देरी में नहीं फंसेगा।
CLAP ऐप: खेत स्तर पर डिजिटल रिकॉर्ड
2025 से हर राज्य के लिए एस्क्रो खाता खोलना जरूरी हो गया है। इसके साथ ही क्रॉप लॉस असेसमेंट ऐप यानी CLAP भी आ गया है।
यह ऐप स्थानीय आपदा से हुए नुकसान का सीधा खेत से रिकॉर्ड बनाता है। अभी यह सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अनिवार्य कर दिया गया है।
आने वाले दिनों में तस्वीर और साफ होगी कि इन तकनीकों से क्लेम मिलने की रफ्तार कितनी बदलती है। लेकिन दिशा साफ है – डेटा अब आदमी के भरोसे नहीं, मशीन के भरोसे तय होगा। किसानों के लिए इसका मतलब है कम इंतजार और ज्यादा पारदर्शिता।
किसानों पर इसका क्या असर पड़ेगा?
नई व्यवस्था लागू होने से तीन बड़े फायदे मिलने की उम्मीद है।
- फसल नुकसान का अधिक सटीक आकलन।
- क्लेम प्रक्रिया में पारदर्शिता।
- बीमा राशि का अपेक्षाकृत तेज भुगतान।
हालांकि नई तकनीकों का असर जमीन पर कितना दिखता है, इसकी तस्वीर आने वाले फसल सीजन और क्लेम सेटलमेंट के बाद और साफ होगी।
Official Sources
- कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (pmfby.gov.in)
“प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना नई तकनीक” से संबंधित महत्वपूर्ण सवाल और उनके जवाब (FAQs):
यह राज्य और बीमा कंपनी की प्रक्रिया पर निर्भर करता है, लेकिन देरी होने पर अब कंपनी को 12% ब्याज देना होगा, जिससे तेजी आने की उम्मीद है।
YS-Tech एक सैटेलाइट और रिमोट सेंसिंग आधारित तकनीक है जो फसल के नुकसान का वैज्ञानिक तरीके से आकलन करती है।
फिलहाल असम, हिमाचल प्रदेश, केरल, ओडिशा, पुडुचेरी, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में यह नेटवर्क काम कर रहा है।
यह ऐप खेत स्तर पर नुकसान का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करता है, जिससे क्लेम प्रक्रिया में गलत आकलन की गुंजाइश कम हो जाती है।
हां, जिन राज्यों में यह लागू है वहां के पंजीकृत PMFBY किसानों को इसका सीधा फायदा मिलेगा।
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