किसान भाइयों ध्यान दें, फसल बीमा कराने की डेडलाइन बस कुछ दिन बाकी
हनुमानगढ़! अगर आप राजस्थान के निवासी है और खेती करते हैं, तो यह खबर आपके काम की है। राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को खरीफ 2026 और रबी 2026-27, दोनों सीजन के लिए लागू कर दिया है। मकसद साफ है, प्राकृतिक आपदा और खराब मौसम से फसल बर्बाद होने पर किसानों को आर्थिक सहारा देना।
यह योजना भारत सरकार की परिचालन मार्गदर्शिका-2023 और राज्य स्तरीय समन्वय समिति की बैठक में लिए गए फैसलों के मुताबिक लागू हुई है। इसे प्रदेश के पुराने 41 जिलों के आधार पर लागू किया जाएगा।
कौन-कौन सी फसलें आएंगी इस योजना में?
खरीफ सीजन में बाजरा, ज्वार, मक्का, मूंग, मोठ, ग्वार, चंवला, उड़द, अरहर, सोयाबीन, तिल, धान, कपास और मूंगफली समेत कुल 14 फसलें अधिसूचित की गई हैं।
रबी सीजन के लिए गेहूं, जौ, चना, सरसों, तारामीरा, जीरा, धनिया, ईसबगोल, मेथी, रबी मक्का और मसूर, यानी 11 फसलें शामिल की गई हैं। बीमा इकाई क्षेत्र तहसील और पटवार मंडल तय किया गया है।
बीमा कराना है या नहीं, फैसला किसान का
फसल बीमा कराना पूरी तरह वैकल्पिक है। ऋणी, गैर-ऋणी और पात्र बंटाईदार, सभी किसान अपनी अधिसूचित फसलों का बीमा करा सकते हैं।
अगर ऋणी किसान योजना से बाहर रहना चाहते हैं, तो उन्हें खरीफ के लिए 24 जुलाई और रबी के लिए 24 दिसंबर तक बैंक में घोषणा-पत्र देना होगा। ऐसा नहीं करने पर उन्हें अपने आप योजना में शामिल मान लिया जाएगा।
गैर-ऋणी किसानों के लिए डेडलाइन नजदीक
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि गैर-ऋणी किसानों के लिए खरीफ की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है। रबी के लिए यह डेडलाइन 31 दिसंबर 2026 तक है।
बीमा नजदीकी बैंक शाखा, सहकारी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, डाकघर या CSC के जरिए कराया जा सकता है। अधिकृत बीमा एजेंट और राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल का विकल्प भी खुला है।
प्रीमियम कितना देना होगा?
अच्छी बात यह है कि किसानों को पूरा प्रीमियम नहीं भरना पड़ता। खरीफ फसलों के लिए अधिकतम 2%, रबी फसलों के लिए 1.5% और वार्षिक वाणिज्यिक व बागवानी फसलों के लिए 5% प्रीमियम ही किसान को देना है। बाकी का भार केंद्र और राज्य सरकार उठाती हैं।
किन नुकसानों पर मिलेगी बीमा सुरक्षा?
सूखा, बाढ़, जलप्लावन, कीट-रोग, भूस्खलन, बिजली गिरने से लगी आग, तूफान, ओलावृष्टि और चक्रवात, इन सबसे होने वाले नुकसान पर बीमा कवर मिलेगा। बाधित या निष्फल बुवाई की स्थिति भी इसमें शामिल है।
एक और अहम बात, फसल कटाई के बाद अगर खेत में सुखाने के लिए रखी फसल चक्रवात या असामयिक बारिश से खराब होती है, तो अधिकतम 14 दिन तक व्यक्तिगत आधार पर बीमा सुरक्षा मिलेगी।
नुकसान होने पर 72 घंटे में देनी होगी सूचना
यह हिस्सा बहुत जरूरी है, इसे नजरअंदाज मत कीजिए। फसल कटाई के बाद नुकसान होने पर किसान को 72 घंटे के भीतर कृषि रक्षक पोर्टल, हेल्पलाइन 14447, Crop Insurance App या लिखित रूप से बैंक या कृषि विभाग को सूचना देनी होगी।
अगर तय समय में सूचना नहीं दे पाए, तो अधिकतम सात दिन के भीतर बीमा कंपनी को निर्धारित फॉर्म में पूरी जानकारी देनी होगी।
बुवाई ही नहीं हो पाई तो क्या होगा?
कम बारिश या खराब मौसम की वजह से अगर किसी इलाके में 75% या ज्यादा क्षेत्र में बुवाई नहीं हो पाती, तो पात्र किसानों को बीमित राशि का 25% तक मुआवजा मिल सकता है। हालांकि इसके लिए राज्य सरकार को तय समय-सीमा में यह स्थिति अधिसूचित करनी होगी।
गेहूं-सोयाबीन के लिए नई टेक्नोलॉजी
गेहूं और सोयाबीन के लिए इस बार YES-TECH तकनीक का इस्तेमाल होगा। 5,000 हेक्टेयर से ज्यादा बुवाई क्षेत्र वाले जिलों में फसल कटाई प्रयोगों से मिली उपज को 50% और तकनीकी उपज को 50% भार दिया जाएगा।
क्लेम कैसे तय होगा?
गारंटी उपज तय करने के लिए 2018-19 से 2024-25 तक के सात सालों में से बेहतरीन पांच साल की औसत उपज को आधार बनाया गया है। इसे 80% जोखिम स्तर से गुणा कर गारंटी उपज निकाली गई है।
फसल कटाई प्रयोग CCE Agri App के जरिए ऑनलाइन होंगे। पटवार मंडल स्तर पर हर फसल के लिए 4 और तहसील स्तर पर न्यूनतम 16 प्रयोग होंगे। अगर असली उपज गारंटी उपज से कम निकलती है, तो उस अनुपात में किसानों को क्षतिपूर्ति मिलेगी।
किस कंपनी के पास है जिम्मेदारी?
प्रदेश के 41 जिलों को 8 क्लस्टर में बांटा गया है। हनुमानगढ़ जिले के लिए ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को जिम्मेदारी दी गई है। दावों के आकलन और भुगतान का पूरा काम यही कंपनी संभालेगी।
पैसा कब और कैसे मिलेगा?
व्यापक फसल नुकसान की स्थिति में केंद्र और राज्य से प्रीमियम अनुदान मिलने के बाद अधिकतम तीन हफ्ते के भीतर क्लेम की राशि सीधे DBT के जरिए किसानों के बैंक खाते में आ जाएगी।
फसल कटाई के बाद नुकसान के मामलों में संयुक्त समिति की रिपोर्ट आने के बाद 15 दिन के भीतर भुगतान होगा।
आगे किसानों को क्या करना चाहिए?
अगर आपकी फसल इस लिस्ट में शामिल है, तो 31 जुलाई की डेडलाइन को हल्के में मत लीजिए। बीमा कराते वक्त भूमि, फसल, बैंक खाता, आधार और एग्रीस्टैक आईडी जैसे दस्तावेज पूरे और सही रखें। पॉलिसी और आवेदन की जानकारी संभालकर रखें, ताकि नुकसान होने पर 72 घंटे के भीतर सूचना देने में कोई दिक्कत न आए। कृषि विभाग की अपील साफ है, समय रहते बीमा कराएं, वरना नुकसान होने पर पछताने के अलावा कुछ हाथ नहीं आएगा।
किसानों द्वारा पूछे जाने वाले सामान्य सवाल
गैर-ऋणी किसान खरीफ के लिए 31 जुलाई 2026 और रबी के लिए 31 दिसंबर 2026 तक बीमा करा सकते हैं।
खरीफ फसलों के लिए अधिकतम 2%, रबी फसलों के लिए 1.5% और वार्षिक वाणिज्यिक व बागवानी फसलों के लिए 5% प्रीमियम किसान को देना होगा।
फसल कटाई के बाद नुकसान होने पर 72 घंटे के भीतर कृषि रक्षक पोर्टल, हेल्पलाइन 14447 या Crop Insurance App पर सूचना देनी होगी।
नहीं, फसल बीमा कराना पूरी तरह स्वैच्छिक है। हालांकि ऋणी किसान अगर बाहर रहना चाहें तो उन्हें तय तारीख तक घोषणा-पत्र देना होगा।
व्यापक फसल नुकसान की स्थिति में अधिकतम तीन सप्ताह में और फसल कटाई के बाद नुकसान के मामलों में 15 दिन के भीतर राशि बैंक खाते में आ जाएगी।
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