PMFBY Hanumangarh: हनुमानगढ़ जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को खरीफ 2026 और रबी 2026-27 सीजन के लिए लागू कर दिया गया है। राज्य सरकार ने प्राकृतिक आपदा और खराब मौसम से फसल के नुकसान पर किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के मकसद से यह कदम उठाया है। हनुमानगढ़ जिले में योजना चलाने की जिम्मेदारी इस बार ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को दी गई है। इस बार खरीफ सीजन के लिए फ़सल बीमा कवर करवाने की डेडलाइन 16 अगस्त 2026 है । प्रदेश भर में देखें तो यह स्कीम 41 जिलों में कुल 25 फसलों को बीमा कवर देगी।
फसल बीमा योजना पूरी तरह वैकल्पिक, किसे मिलेगा फायदा
कृषि विभाग साफ कहता है, यह योजना स्वैच्छिक है। कोई जबरदस्ती नहीं। ऋणी किसान, गैर-ऋणी किसान और पात्र बंटाईदार, तीनों इसका फायदा उठा सकते हैं।
जिन किसानों ने बैंक से कर्ज ले रखा है, वे अपने आप इस स्कीम में शामिल माने जाते हैं। अगर कोई ऋणी किसान बाहर रहना चाहता है, तो उसे अपने बैंक में एक घोषणा-पत्र जमा करना होगा। सीधी सी बात है – कुछ न करें तो बीमा अपने आप कट जाएगा।
बीमा कराने की आखिरी तारीख और तरीका
गैर-ऋणी किसानों के लिए खरीफ सीजन की डेडलाइन 16 अगस्त तय की गई है। जिन किसानों ने अभी तक रजिस्ट्रेशन नहीं कराया, उन्हें तुरंत अपनी नजदीकी बैंक शाखा या कृषि विभाग से संपर्क कर स्थिति जरूर पता कर लेनी चाहिए। रबी सीजन की बात करें तो इसके लिए अंतिम तारीख 31 दिसंबर रखी गई है।
किसान अपनी फसल बीमा बैंक, डाकघर, कॉमन सर्विस सेंटर यानी सीएससी, अधिकृत बीमा एजेंट या फिर सीधे राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल जो सुविधाजनक लगे, वहां से करा सकते हैं।
25 फसलों को मिलेगी बीमा सुरक्षा
खरीफ सीजन में बाजरा, ज्वार, मक्का, मूंग, मोठ, ग्वार, उड़द, अरहर, सोयाबीन, तिल, धान, कपास और मूंगफली समेत कुल 14 फसलें अधिसूचित की गई हैं। रबी में गेहूं, जौ, चना, सरसों, तारामीरा, जीरा, धनिया, ईसबगोल, मेथी, रबी मक्का और मसूर सहित 11 फसलें शामिल हैं।
हर फसल का बीमा तहसील और पटवार मंडल स्तर पर तय की गई इकाइयों के आधार पर होगा। मतलब इलाके के हिसाब से नुकसान का आकलन अलग-अलग होगा।
हनुमानगढ़ में खरीफ 2026 का प्रीमियम रेट कितना
किसान के हिस्से का प्रीमियम बीमित राशि के 0.30 प्रतिशत पर तय किया गया है। नीचे दी टेबल में साफ दिख रहा है, फसल के हिसाब से कितनी बीमित राशि पर कितना प्रीमियम जमा करना होगा।
| फसल | बीमित राशि (₹/हेक्टेयर) | किसान प्रीमियम दर | किसान प्रीमियम (₹/हेक्टेयर) |
|---|---|---|---|
| कपास | ₹1,38,602 | 0.30% | ₹416 |
| मूंग | ₹50,250 | 0.30% | ₹151 |
| मूंगफली | ₹1,50,535 | 0.30% | ₹452 |
| ग्वार | ₹35,092 | 0.30% | ₹105 |
| मोठ | ₹13,814 | 0.30% | ₹41 |
| चावल | ₹1,29,093 | 0.30% | ₹387 |
| बाजरा | ₹38,262 | 0.30% | ₹115 |
कपास की बीमित राशि सबसे ज्यादा है, इसलिए प्रीमियम भी बाकी फसलों से कहीं ज्यादा बैठता है। मोठ में सबसे कम प्रीमियम देना होगा, सिर्फ 41 रुपये प्रति हेक्टेयर।
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किन नुकसानों पर मिलेगा मुआवजा
बीमा का दायरा काफी बड़ा रखा गया है। कम बारिश, सूखा, लंबी शुष्क अवधि, बाढ़, जलभराव, कीट-रोग का हमला, भूस्खलन, बिजली गिरने से लगी आग, तूफान, चक्रवात और ओलावृष्टि इन सबसे होने वाला नुकसान कवर होगा।
जानकारी के लिए आपको बता दे कि फसल कटने के बाद अगर उपज खेत में सुखाने के लिए रखी है, और उसी दौरान चक्रवाती बारिश, असमय बारिश या ओलावृष्टि से नुकसान होता है, तो अधिकतम 14 दिन तक व्यक्तिगत आधार पर बीमा सुरक्षा मिलेगी।
अगर कम बारिश की वजह से 75 प्रतिशत या उससे ज्यादा इलाके में बुवाई ही नहीं हो पाती, तो पात्र किसानों को बीमित राशि का 25 प्रतिशत तक मुआवजा मिल सकता है। यह राहत बुवाई से पहले वाले नुकसान के लिए है।
फसल खराब होने पर क्लेम कैसे करें
यहीं सबसे जरूरी बात आती है। फसल में नुकसान दिखते ही किसान को 72 घंटे के अंदर सूचना देनी होगी। देर हुई तो क्लेम में दिक्कत आ सकती है।
सूचना देने के भी कई तरीके हैं — संबंधित पोर्टल, हेल्पलाइन नंबर, क्रॉप इंश्योरेंस ऐप, या फिर सीधे बैंक और कृषि विभाग को बताया जा सकता है।
इस बार उपज के आकलन में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया गया है, ताकि प्रक्रिया तेज और पारदर्शी रहे। दावा मंजूर होने के बाद पैसा सीधे किसान के बैंक खाते में डीबीटी यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए पहुंचेगा। बीच में किसी एजेंट या दफ्तर के चक्कर की जरूरत नहीं।
किसानों के लिए जरूरी सलाह
खरीफ फसलों का बीमा करवाने की डेडलाइन को 31 जुलाई से बढ़ाकर 16 अगस्त कर दिया गया है , इसलिए जिन किसानों ने अभी तक बीमा नहीं कराया, वे जल्द से जल्द बीमा करवा लें । रबी सीजन के लिए वक्त है, 31 दिसंबर तक रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।
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