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Gold Price Prediction 2025: सोने में भारी गिरावट! क्या अब सोना सच में 60 हजार हो जायेगा फिर से? जानें एक्सपर्ट की राय

Jagat Pal

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Gold Price Prediction 2025: भारतीय निवेशकों के लिए सोना इस साल “सोने पर सुहागा” साबित नहीं हो रहा। पिछले दो महीनों में घरेलू बाजार में सोना अपने रिकॉर्ड स्तर (1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम) से गिरकर 92,000 रुपये तक पहुंच गया है। गोल्ड का प्राइस (Gold Price) भारत में ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर (Global Level) पर भी डगमगाया है, जहां अप्रैल 2025 में सोना 3,500 डॉलर प्रति औंस का शिखर छूने के बाद अब कीमत 3,140 डॉलर पर आ गई है।

सोने में निवेश (Gold Investment) करने वाले सभी निवेशकों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या सोने की कीमतों में आने वाले दिनों में और गिरावट आएगी? खासकर जब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा हो। सोने की कीमत कई कारकों से प्रभावित होती है, जैसे कि वैश्विक आर्थिक स्थिति, ब्याज दरें (Interest Rate), और मुद्रास्फीति (inflation)। सोने की कीमतों में जारी गिरावट को लेकर क्या है जानकारों की राय? आइए जानें एक्सपर्ट की राय

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92 हज़ार तक लुढ़का सोना, आगे और गिरावट संभव?

भारतीय सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना अब ₹92,000 प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। ग्लोबल मार्केट की बात करें तो जहां अप्रैल में यह 3,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया था, वहीं अब 3,140 डॉलर पर आ चुका है। यह गिरावट सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं, बल्कि उस भरोसे का संकेत है जो निवेशकों का सोने से धीरे-धीरे उठ रहा है।

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बाजार के जानकार मानते हैं कि यह शुरुआत भर है। ऑल बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के चेयरमैन योगेश सिंघल ने याद दिलाया कि 2013 में भी कुछ ऐसा ही हुआ था—तब सोना 3,230 डॉलर से सीधे 1,820 डॉलर तक टूट गया था। इतिहास खुद को दोहराता है तो यह गिरावट ₹60,000 से भी नीचे पहुंच सकती है।

सोने में निवेश को लेकर जानकारों की राय क्या कहती है?

Way2Wealth Brokers के एक्सपर्ट्स का कहना है कि अभी सोने में नया पैसा लगाना ठीक नहीं रहेगा। हाल ही में सोने के दाम लगातार गिरते नजर आ रहे हैं और तकनीकी संकेतों (Technical Signals) से भी यही लग रहा है कि कीमतें और नीचे जा सकती हैं। उनका सुझाव है कि अगर आप सोना खरीदने का सोच रहे हैं तो थोड़ा रुक जाइए और देखिए कि रेट और कितना नीचे जाता है।

जिगर त्रिवेदी का मानना है कि सोने के दाम (Gold Price) में गिरावट का रुझान बना हुआ है। हां, बीच-बीच में थोड़ी रिकवरी हो सकती है, लेकिन जब तक MCX गोल्ड जून फ्यूचर्स 92,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के ऊपर मजबूत होकर नहीं टिकता, तब तक गिरावट की आशंका बनी रहेगी। उनका कहना है कि अगर सोना 90,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के पास आता है, तब उसमें मजबूती आने के संकेत मिल सकते हैं। इसलिए सलाह दी जाती है कि जब भी भाव थोड़ा ऊपर जाए, तो मुनाफा लेकर निकल जाना समझदारी होगी।

Commodity Sector के अन्य जानकारों की भी यही राय है कि आने वाले हफ्ते में सोने की कीमतें और गिर सकती हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सोना कुछ समय बाद फिर से चढ़ सकता है, लेकिन फिलहाल इसमें नया निवेश करने से बचने की सलाह दी जा रही है। उनका कहना है कि अगले कुछ दिन सोने की चाल को ध्यान से देखना चाहिए और फिर फैसला लेना चाहिए कि निवेश करना है या नहीं।

क्यों टूट रहा है सोना: 5 बड़ी वजहें

1. भारत-पाक युद्धविराम: अनिश्चितता घटी, सुरक्षित निवेश की ज़रूरत भी

12 मई को भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्धविराम के बाद क्षेत्रीय तनाव में जबरदस्त कमी आई है। निवेशकों के लिए ये खबर राहत की है, लेकिन इससे सोने की मांग पर सीधा असर पड़ा है। अब जब डर कम है, तो ‘सुरक्षित संपत्ति’ (Secure Assets) की तरफ भागने की ज़रूरत भी नहीं रही।

2. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ी, डॉलर मजबूत

अमेरिकी डॉलर की मजबूती और 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड के 4.5% से ऊपर जाने के बाद सोने पर दबाव आना स्वाभाविक था। डॉलर महंगा हुआ, तो सोना और महंगा लगने लगा—खरीदारों की दिलचस्पी घटी, और दाम भी।

3. चीन-अमेरिका तनाव में नरमी

एक्सपर्ट्स के अनुसार अमेरिकी ट्रेड वॉर में कमी आई है। टैरिफ को लेकर बनी नई सहमति के चलते अमेरिका और चीन के बीच रिश्तों में नरमी आई है। जब तनाव कम होता है, तो निवेशक रिस्क लेना पसंद करते हैं, और ऐसे में सोना पीछे छूट जाता है।

4. मुनाफावसूली का दौर

अप्रैल में जब सोना रिकॉर्ड स्तर पर था, तब जिन लोगों ने खरीदा था, वे अब मुनाफा काटने में लगे हैं। जैसे ही बिकवाली तेज़ हुई, कीमतों में गिरावट आनी शुरू हो गई।

5. शेयर बाज़ार में बूम: सोने से निकली पूंजी

ग्लोबल स्टॉक्स में जोश है। निवेशक अब कम जोखिम वाले और तेज़ रिटर्न वाले विकल्पों की तलाश में हैं। नतीजा ये कि सोने से पैसा निकालकर शेयरों की ओर झुकाव बढ़ रहा है।

क्या करें निवेशक?

लघु अवधि में गिरावट भले ही परेशान कर रही हो, लेकिन जानकार अब भी मानते हैं कि दीर्घकालिक निवेश (Long Term Investments) के लिए सोना एक भरोसेमंद विकल्प है। सवाल यह नहीं कि भाव कितना गिरेगा, बल्कि यह है कि आप कब तक इंतज़ार कर सकते हैं।

डिसक्लेमर: ऊपर के विचार और सुझाव विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं। न्यूज़ ई मंडी रेट्स इन सुझावों पर अमल करने से मिले परिणाम के लिए बिल्कुल भी जिम्मेदार नहीं है। किसी भी प्रकार का निवेश सोच-समझकर और अपने पर्सनल फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लेकर ही करें ।

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जगत पाल पिछले 8 वर्षों से एक पेशेवर ब्लॉगर हैं। वे शिक्षा, ऑटो, कृषि समाचार, मंडी भाव, गैजेट्स और बिजनेस जैसे विषयों पर विशेषज्ञता रखते हैं। वर्तमान में वे news.emandirates.com के संपादक और प्रमुख लेखक हैं, जहाँ वे भरोसेमंद और जानकारीपूर्ण कंटेंट प्रदान करते हैं।