Highlights
- El Nino के चलते इस साल कमजोर मानसून का अनुमान, किसानों के सामने पैदावार की चुनौती
- तिल, अरहर, मूंग, ज्वार, बाजरा, रागी और मक्का जैसी कम पानी वाली फसलें बेहतर विकल्प
- मिलेट्स की खेती सबसे बेहतर, एक बार सिंचाई में भी तैयार हो जाते हैं
- मल्चिंग और बीज उपचार दो जरूरी तरीके जो सूखे से बचाव में मददगार
नई दिल्ली: इस साल El Nino के असर से देशभर में मानसून कमजोर रहने का अनुमान है। Indian Agriculture के लिए यह एक बड़ी चुनौती है, खासकर खरीफ सीजन की फसलों के लिए। ऐसे में किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल जो खड़ा है वो ये है कि कम बारिश में कौन सी फसलें बोई जाएं जिनसे नुकसान कम हो और पैदावार अच्छी मिले।
खबर है कि IMD Monsoon Forecast के मुताबिक इस बार सामान्य से काफी कम बारिश हो सकती है। ऐसे में किसानों को Drought Resistant Crops यानी कम पानी में तैयार होने वाली फसलों पर ध्यान देना होगा। चलिए जानते हैं कि कौन-कौन सी फसलें इस मौसम में किसानों के लिए बेहतर साबित हो सकती हैं।
तिलहन और दलहन की खेती: कम पानी में भी मुनाफा
Oilseed Cultivation इस साल किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बन सकती है। खरीफ सीजन में तिल की खेती काफी फायदेमंद मानी जाती है। तिल ऐसी फसल है जो ऐसे खेतों में भी तैयार हो जाती है जहां पानी ठहरता नहीं है।
Water Efficient Farming के तहत तिल की खेती के लिए सिर्फ 2-3 बार सिंचाई करनी पड़ती है। बुवाई के बाद खेत की मेड को ढलान वाली जगह पर काट देना चाहिए, ताकि अचानक बारिश होने पर जलभराव की समस्या न बने। यह छोटी सी तकनीक बड़े नुकसान से बचा सकती है।
इसके अलावा अरहर और मूंग जैसी Pulses Farming भी कम बारिश में अच्छी पैदावार दे सकती है। ये दलहनी फसलें सूखे को झेलने की क्षमता रखती हैं और किसानों की आमदनी का एक मजबूत स्रोत बन सकती हैं।
मिलेट्स की खेती: सबसे बेहतर विकल्प
कम बारिश में Millet Cultivation यानी मोटे अनाजों की खेती सबसे बेहतर मानी जाती है। इन फसलों की खासियत यह है कि इन्हें न तो खास तैयारी चाहिए और न ही ज्यादा देखभाल।
Climate Smart Agriculture के तहत मिलेट्स की एक बार सिंचाई में भी अच्छी पैदावार मिल सकती है। ज्वार, बाजरा और रागी इस कैटेगरी में सबसे आगे हैं। सरकार भी Coarse Grains को बढ़ावा दे रही है, जिससे बाजार में इनकी मांग बढ़ रही है।
मक्के की खेती: तेजी से तैयार होने वाली फसल
Maize Farming कम पानी में तैयार होने वाली फसलों में शुमार है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 60-90 दिनों में तैयार हो जाती है। यानी कम समय में किसानों को अच्छा रिटर्न मिल सकता है।
इसके लिए भी 2-3 बार की सिंचाई पर्याप्त होती है। हल्की-फुल्की बारिश में भी मक्का अच्छी पैदावार दे सकता है। बुवाई के लिए खेत की कोई खास तैयारी करने की जरूरत नहीं है, जिससे किसानों का समय और पैसा दोनों बचते हैं।
सूखे से बचाव के लिए 2 जरूरी तरीके
Water Conservation Techniques अपनाना इस साल सबसे ज्यादा जरूरी है। स्रोत के मुताबिक किसानों को दो बातों पर खास ध्यान देना चाहिए:
1. मल्चिंग विधि अपनाएं:- Mulching Method से खेत में लंबे समय तक नमी बनी रहती है। यह तकनीक मिट्टी की नमी को बचाती है और पानी की बचत करती है। गर्मी में यह फसलों को बचाने का सबसे कारगर तरीका है।
2. बीजों का उपचार करें :- Seed Treatment से फसलें सूखे से लड़ने की क्षमता विकसित करती हैं। उपचारित बीजों से उगने वाली फसलें ज्यादा मजबूत होती हैं और कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती हैं।
किसानों के लिए स्पेशल टिप
इस साल Kharif Season में अपनी जमीन की मिट्टी की क्वालिटी और पानी की उपलब्धता को ध्यान में रखकर फसलों का चुनाव करें। ज्यादा पानी मांगने वाली फसलों से बचें और Low Water Crops पर फोकस करें।
FAQs
El Nino एक जलवायु घटना है जिसके चलते प्रशांत महासागर के पानी का तापमान बढ़ जाता है। इसके कारण भारत में मानसून कमजोर रहने का अनुमान लगाया जा रहा है।
तिल, अरहर, मूंग, ज्वार, बाजरा, रागी और मक्का जैसी फसलें कम पानी में भी अच्छी पैदावार दे सकती हैं।
मिलेट्स की खेती के लिए अधिकतम एक बार की सिंचाई पर्याप्त होती है। इन्हें खास तैयारी या विशेष देखभाल की भी जरूरत नहीं होती।
मक्के की फसल 60-90 दिनों के बीच तैयार हो जाती है और इसके लिए 2-3 बार की सिंचाई पर्याप्त होती है।
मल्चिंग विधि अपनाएं जिससे नमी लंबे समय तक बनी रहेगी, और बीजों का उपचार करें जो सूखे से लड़ने में मददगार होगा।
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