Gold ETFs Crash 10%, Silver Tanks 19% ETF Investors के करोड़ों डूबे, अब क्या करें?
Gold Silver ETFs Crash: पिछले लंबे समय से सोने और चांदी की क़ीमतों में लगातार तेज़ी से इन धातुओं में निवेश करने वाला निवेशक हर रोज काफ़ी ख़ुश नज़र आ रहा था। लेकिन आज जनवरी माह के अंतिम कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को अपना माथा पकड़े बैठा है, उससे आज समझ नहीं आ रहा कि उससे क्या करना चाहिए। कारण तो आपको भी पता ही होगा, चलिए अगर नहीं पता तो हम बता देते है, कारण है आज गोल्ड सिल्वर की कीमतों में आई भारी गिरावट । जी हाँ Gold ETF और Silver ETF के ज़रिए सोने व चांदी निवेश करने वालों ने आज अपने पोर्टफोलियों को गिरते देखा तो उनके लिए समझना अब मुश्किल हो गया है की अब उन्हें क्या करना चाहिए। कुछ निवेशक तो ऐसे भी है जिन्होंने सुबह की गिरावट के बाद नया निवेश तक कर डाला।
अगर आपने इसे खरीदारी का मौका मानकर लपक लिया, तो शायद आप को आज ठगा महसूस कर रहे होंगें । क्योंकि वाकई में, सोना और चांदी के एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स में शुक्रवार को मुनाफावसूली का तूफान आया हुआ है, कहीं 14% तो कहीं 19% तक की गिरावट देखने को मिल रही है। आज की यह गिरावट उस जबरदस्त रैली के बाद है जिसमें चांदी ने MCX पर जनवरी में 78.21% की छलांग लगाई थी। अब तक का सबसे शानदार मासिक प्रदर्शन। लेकिन सवाल यह है की क्या आज की यह गिरावट आपके लिए एंट्री करने का बेहतरीन मौका है बड़ी गिरावट का संकेत?
शुक्रवार को आंकड़ों में तबाही मंजर
बाजार में जब इतने बड़े लेवल पर मुनाफ़ावसूली शुरू होता है तो नंबर्स खुद बोलते हैं। निवेशकों के लिए बजट से पहले 30 जनवरी का दिन याद रखने लायक बन गया है ।
Zerodha Silver ETF और SBI Silver ETF करीब 16.50% टूट गए। Nippon India Silver ETF में 17% की गिरावट देखने को मिली। लेकिन सबसे बड़ा झटका Kotak Silver ETF को लगा यह 19% की दर से नीचे गिरा है ।
सोना भी नहीं बचा इस गिरावट से । Nippon India Gold ETF 10% लुढ़का। ICICI Prudential Gold ETF और ICICI Prudential Silver ETF दोनों करीब-करीब 8.70% तक की बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है ।
यह सिर्फ घरेलू नहीं, एक वैश्विक स्तर की कहानी थी। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्पॉट सिल्वर 13% भागकर 100.55 डॉलर प्रति औंस पर आ चुका है, गुरुवार को यह 121.64 डॉलर पर था। स्पॉट गोल्ड 6.47% गिरकर 5,031.21 डॉलर रह गया, जबकि इससे पहले 5,594.82 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर से करीब 6% फिसल चुका था।
क्या हुआ अचानक?
हर कोई आज आई इस गिरावट की वजह तलाशने में लगा हुआ है। हमारी रिसर्च में जो बाते निकल कर सामने आ रही है उसके मुताबिक़ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए कि फेड चेयर जेरोम पॉवेल की जगह नए चेयरमैन का ऐलान होगा। पूर्व फेड गवर्नर केविन वार्श का नाम चर्चा में है। निवेशक को लग रहा है कि नया चेयरमैन “हॉकिश” (कम नरम) रुख अपना सकता है।
KCM के चीफ ट्रेड एनालिस्ट टिम वॉटरर का कहना है की – फेड की नीतियों की अटकलें, डॉलर की मजबूती और सोने का ओवरबॉट जोन में होना-तीनों ने मिलकर वैश्विक कीमती धातुओं पर प्रेशर बनाया।
डॉलर इंडेक्स +0.41% बढ़कर 96.69 पर पहुंचा। जब डॉलर मजबूत होता है, डॉलर में तय होने वाली धातुएं दूसरी मुद्राओं वालों के लिए महंगी हो जाती हैं। प्रिथ्वी फिनमार्ट के मनोज कुमार जैन स्पष्ट करते हैं की -सोना-चांदी में उतार-चढ़ाव आम बात है, रिकॉर्ड स्तरों से मुनाफावसूली स्वाभाविक है। लेकिन उनका मानना है कि Safe Haven Investment की मांग अभी भी ट्रेंड को सपोर्ट दे सकती है।
इतिहास क्या कहता है?
पैनिक करने से पहले बड़ी तस्वीर देखें। चांदी लगातार नौ महीने से बढ़त में है। सोने ने छठा लगातार monthly gain दर्ज किया है।
इंडसइंड सिक्योरिटीज के जिगर त्रिवेदी का विश्लेषण है-चांदी करीब 15% टूटी जरूर है, लेकिन इसके बावजूद जनवरी में 44% से ज्यादा चढ़ चुकी है। यह ऐतिहासिक है। भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक अनिश्चितता, वॉशिंगटन की नीतियों में बदलाव और डॉलर की कमजोरी ने इस रैली को बनाया।
अब जब करेक्शन आया है, तो क्या यह खतरे की घंटी है? विशेषज्ञ इसे “जरूरत से ज्यादा तेजी” के बाद की स्वाभाविक मुनाफावसूली मान रहे हैं, ट्रेंड बदलने का संकेत नहीं।
अब क्या करें?
UBS ने सोने का टारगेट बढ़ाकर 6,200 डॉलर प्रति औंस कर दिया है। मनोज जैन का कहना है-अमेरिका-ईरान तनाव और सेफ हेवन डिमांड Precious Metals को सपोर्ट दे रही है। मौजूदा गिरावट को खरीदारी का मौका माना जा रहा है।
बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा, लेकिन भू-राजनीतिक जोखिम और आर्थिक अनिश्चितता में सोने-चांदी की बुनियाद मजबूत है। यह गिरावट अनुशासित निवेशक के लिए शायद सही एंट्री पॉइंट साबित हो।
FAQs:
विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा गिरावट मुनाफावसूली से हुई है, मौलिक बदलाव नहीं। UBS ने टारगेट 6,200 डॉलर तय किया है और [Safe Haven Demand] बनी हुई है। लेकिन निवेश हमेशा अपने जोखिम और वित्तीय सलाहकार को ध्यान में रखकर करें।
सभी Silver ETFs एक ही अंतरराष्ट्रीय स्पॉट प्राइस से जुड़े होते हैं, लेकिन घरेलू बाजार में मांग-आपूर्ति और ट्रेडिंग वॉल्यूम के कारण घाटे-फायदे में अंतर आ सकता है। शुक्रवार को खासतौर पर निवेशकों में पैनिक देखा गया।
जनवरी में 20% से ज्यादा की बढ़त 1980 के बाद पहली बार है, लेकिम विशेषज्ञों का मानना है कि यह भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से समर्थित है, सिर्फ अटकलबाजी नहीं।
सोना डॉलर में तय होता है। जब डॉलर मजबूत होता है (0.4% बढ़कर 96.60), तो दूसरी मुद्राओं वाले निवेशकों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे मांग घटती है।
[Gold ETF] और [Silver ETF] में [Liquidity] और [Transparency] बेहतर है, साथ ही [No Storage Issues] होती हैं। लेकिन लंबी अवधि और शारीरिक रूप में धातु चाहने वालों के लिए सिक्के या गहने विकल्प हो सकते हैं।
डिस्क्लेमर:
यह आर्टिकल केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और निवेश सलाह नहीं है। शेयर बाजार और (Commodity Market) में निवेश जोखिमों के अधीन है। यहां दिए गए आंकड़े और विश्लेषण केवल दिए गए समाचार स्रोत पर आधारित हैं। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें। पिछला प्रदर्शन भविष्य के नतीजों की गारंटी नहीं होता। इस खबर में दी गई राय विशेषज्ञों की निजी राय है, जो बाजार की स्थितियों के बदलने के साथ बदल सकती है। समाचार तिथि 30 जनवरी 2026 तक की जानकारी पर आधारित है।
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