मॉनसून की दूसरी पारी होगी फीकी? IMD ने दे दिया साफ इशारा
Monsoon Forecast: खेती बाड़ी करने वाले किसानों को हमेशा बारिश की ही चिंता सताती रहती है कभी कम बारिश तो कभी जरूरत से ज़्यादा बारिश. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शुक्रवार को मासिक बुलेटिन में साफ कहा गया है कि अगस्त-सितंबर माह में देशभर में बारिश सामान्य से कम रहने वाली है. जो की किसानों के लिए चिंता का विषय है.
आंकड़ों की जुबान में समझें तो बारिश ‘लॉन्ग पीरियड एवरेज’ यानी LPA के 94 प्रतिशत से नीचे रह सकती है. सीधी भाषा में कहें तो जितनी बारिश हर साल औसतन होती है, उससे इस बार थोड़ी कम पानी बरसेगा.
LPA का मतलब क्या होता है
LPA यानी किसी तय समय में, किसी खास इलाके में औसतन कितनी बारिश होती है. यह आंकड़ा 30 से 50 साल के पुराने रिकॉर्ड से निकाला जाता है. IMD ने 1971 से 2020 तक के डेटा को आधार बनाया है. इस हिसाब से अगस्त-सितंबर की अवधि में पूरे देश का औसत LPA 422.8 मिमी है. यानी अगर इस साल बारिश उतनी नहीं हुई, तो यह ‘नॉर्मल’ से नीचे मानी जाएगी.
किन राज्यों को मिल सकती है राहत
हालांकि अच्छी बात ये है की यह हाल देश के सभी हिस्सों का नहीं है . पूर्वी प्रायद्वीपीय भारत के कई हिस्सों में सामान्य या उससे ज्यादा बारिश हो सकती है. उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कुछ इलाकों को भी राहत मिल सकती है. पूर्वोत्तर भारत के कुछ क्षेत्र भी इस लिस्ट में शामिल हैं.
बाकी देश का क्या होगा? यह अभी पूरी तरह साफ नहीं है. IMD का कहना है कि तस्वीर आने वाले हफ्तों में और स्पष्ट होगी.
तापमान में भी दिखेगा बदलाव
अगस्त के दौरान ज्यादातर राज्यों में दिन का तापमान सामान्य से ज्यादा रहने का अनुमान है. उत्तर-पश्चिम, मध्य भारत के कुछ हिस्सों और दक्षिण भारत के कुछ इलाकों में तापमान सामान्य या उससे कम भी रह सकता है. रातें भी ठंडी नहीं रहेंगी. देश के ज्यादातर हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य या सामान्य से ऊपर रहने की संभावना जताई गई है.
अल नीनो ने बिगाड़ा खेल
बारिश कम रहने की सबसे बड़ी वजह प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो है. आने वाले दिनों में इसके और मजबूत होने की आशंका है. आईएमडी के मॉनसून मिशन कपल्ड फोरकास्ट सिस्टम (MMCFS) के मॉडल भी यही संकेत दे रहे हैं कि सीजन के बचे हुए हिस्से में अल नीनो का असर बना रहेगा.
अल नीनो और भारतीय मॉनसून का रिश्ता पुराना है. जब भी यह सक्रिय होता है, बारिश पर लगाम लगती नजर आती है. इस बार भी वही पैटर्न दोहराता दिख रहा है.
IOD की भूमिका भी अहम
इंडियन ओशन डायपोल यानी IOD फिलहाल न्यूट्रल स्थिति में है. IMD का अनुमान है कि सीजन के बाकी समय में भी यह स्थिति बनी रह सकती है. कुछ अंतरराष्ट्रीय मौसम एजेंसियां हालांकि अलग तस्वीर दिखा रही हैं. उनके पूर्वानुमान के मुताबिक सितंबर 2026 में सकारात्मक IOD की स्थिति बन सकती है, जिससे बारिश का पैटर्न बदल सकता है.
सितंबर की तस्वीर को लेकर अभी इंतजार करना होगा. IMD ने साफ किया है कि सितंबर 2026 का विस्तृत पूर्वानुमान अगस्त के अंत में जारी होगा.
अगले हफ्ते किन राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी
31 जुलाई से 6 अगस्त 2026 के दौरान उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में मौसम का मिजाज तेज रहने वाला है. गरज-चमक, बिजली गिरने की घटनाएं और 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाएं आम बात होंगी. कुछ जगहों पर हवा की गति 50 किमी प्रति घंटे तक भी पहुंच सकती है.
उत्तर भारत में कहां-कहां बरसेंगे बादल
- हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड: 31 जुलाई से 6 अगस्त तक
- हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब: 31 जुलाई से 5 अगस्त तक
- पश्चिमी उत्तर प्रदेश: 3 से 6 अगस्त तक
- पूर्वी उत्तर प्रदेश: 2 से 6 अगस्त तक
- पश्चिमी राजस्थान: 2 अगस्त को असर दिखेगा
दिल्ली-एनसीआर में रहने वालों के लिए यह जानकारी खास काम की है. अगले पांच दिन छाता साथ रखना बेहतर रहेगा.
भारी बारिश का अलर्ट, प्रशासन ने बरतने को कहा सावधानी
चेतावनी वाली सूची में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख सबसे ऊपर हैं, जहां 31 जुलाई से 4 अगस्त तक भारी बारिश की आशंका है. हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में यह चेतावनी 31 जुलाई से 6 अगस्त तक लागू रहेगी. हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ और दिल्ली में 31 जुलाई से 5 अगस्त तक कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है.
पूर्वी राजस्थान के लिए स्थिति और गंभीर है. यहां 1 अगस्त को कुछ जगहों पर बहुत भारी बारिश का अनुमान जताया गया है.
मध्य भारत में भी थमेगा नहीं बारिश का दौर
पश्चिमी मध्य प्रदेश में 31 जुलाई और 1 अगस्त को बारिश होगी. पूर्वी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 31 जुलाई और फिर 3 से 6 अगस्त के बीच पानी बरसेगा. विदर्भ में 31 जुलाई से 1 अगस्त और 6 अगस्त को कई जगहों पर बारिश का अनुमान है.
गरज-चमक और बिजली गिरने का खतरा भी कम नहीं है. विदर्भ में 1 से 4 अगस्त तक और छत्तीसगढ़ में 31 जुलाई से 4 अगस्त तक आंधी-तूफान की आशंका जताई गई है. भारी बारिश की बात करें तो 31 जुलाई को विदर्भ और पश्चिमी मध्य प्रदेश में, जबकि 3 से 6 अगस्त के दौरान छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में तेज बारिश हो सकती है.
खराब मौसम को देखते हुए मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है. जिन इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी है, वहां स्थानीय प्रशासन की सलाह मानना ही समझदारी होगी.
किसानों के लिए सलाह
अगर आप खेती-किसानी से जुड़े हैं, तो अगले कुछ दिनों का पूर्वानुमान ध्यान से देखकर ही खेत का काम प्लान करें. यात्रा पर निकलने से पहले अपने राज्य की चेतावनी जरूर चेक कर लें, खासकर पहाड़ी इलाकों में. सितंबर की पूरी तस्वीर के लिए अगस्त के आखिरी हफ्ते तक इंतजार करना होगा, जब IMD नया बुलेटिन जारी करेगा.
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Official Sources
- भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) – mausam.imd.gov.in
- IMD अगस्त-सितंबर 2026 मासिक बुलेटिन (Monthly Bulletin) PDF
मौसम से जुड़े सामान्य सवाल और उनके जवाब (FAQs):
IMD के मुताबिक इस अवधि में देशभर में बारिश सामान्य से कम, यानी LPA के 94 प्रतिशत से नीचे रहने का अनुमान है.
LPA यानी लॉन्ग पीरियड एवरेज, किसी क्षेत्र में तय समय के दौरान होने वाली औसत बारिश है, जो 30-50 साल के आंकड़ों से निकाली जाती है. IMD ने इसके लिए 1971-2020 का डेटा इस्तेमाल किया है.
प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है, जो आने वाले समय में और मजबूत हो सकता है.
जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, पूर्वी राजस्थान, विदर्भ और छत्तीसगढ़ जैसे इलाकों में 31 जुलाई से 6 अगस्त के बीच भारी बारिश का अलर्ट है.
IMD ने बताया है कि सितंबर 2026 का विस्तृत पूर्वानुमान अगस्त महीने के अंत में जारी किया जाएगा.
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