Fed Rate Cut Decision: बुधवार को अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी ब्याज दरों को 3.5% से 3.75% के दायरे में ही बनाए रखा है। यानी फिलहाल कोई राहत नहीं। अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व (Fed) ने बुधवार देर रात (भारतीय समय अनुसार 11:30 PM) इंटरेस्ट रेट पर अपना फ़ैसला सुनाया। जानकारी के लिए आपको बता दें कि पिछले साल के अंत से Fed ने Interest Rate में अभी कोई बदलाव नहीं किया है। यह लगातार छटवीं बार है जब अमेरिकी बैंक ने इंटरेस्ट रेट में कोई बदलाव ना करते हुए इसे स्थिर बनाए रखा है।
बाजार के जानकारों को इस बात का अंदाजा पहले से था। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) के तीन सदस्यों ने इस फैसले पर असहमति जताई है । इसके पीछे उन्होंने जो वजह बताते हुए कहा कि, उनका मानना है कि दरें घटाने की बजाय अभी और बढ़ानी चाहिए।
यह फैसला केविन वॉर्श (kevin warsh) के बतौर फेड चेयरमैन की दूसरी बैठक का नतीजा है। वॉर्श ने मई 2026 में जेरोम पॉवेल की जगह यह पद संभाला था।
किसने की असहमति
डलास फेड की अध्यक्ष लॉरी लोगन ने खुलकर कहा कि उनके हिसाब से दरें “थोड़ी” ज्यादा होनी चाहिए थीं। क्लीवलैंड फेड की बेथ हैमक, मिनियापोलिस के नील कश्करी और गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर – इन तीनों ने भी सख्त नीति के पक्ष में बात रखी।
नतीजा यह हुआ कि यही तीन अधिकारी कमेटी के फैसले से अलग रुख अपनाते हुए दिखे। इससे चेयरमैन वॉर्श के लिए मीटिंग के बाद होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में जवाब देना थोड़ा मुश्किल हो सकता है।
महंगाई का गणित उलझा हुआ है
अब बात करे महंगाई की तो जून में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) में अचानक 0.4% की गिरावट आई थी। जिसके पीछे मुख्य वजह पेट्रोल की कीमतों में कमी । एक पल के लिए लगा कि राहत मिलने वाली है।
पर मामला यहीं खत्म नहीं होता। पिछले कुछ हफ्तों में मिडिल ईस्ट का हालात फिर बिगड़ गए हैं, और इसका सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ा है। पेट्रोल पंप पर मिली राहत अब पलट चुकी है।
गौर करने वाली बात यह भी है कि मई महीने में सालाना महंगाई दर 4.2% तक पहुंच गई थी – पिछले 3 साल से ज्यादा का सबसे ऊंचा स्तर है । इसके पीछे का मुख्य कारण अमेरिका-ईरान तनाव के चलते गैसोलीन कीमतों में उछाल रहा ।
आगे क्या होगा
म्यूचुअल ऑफ अमेरिका कैपिटल मैनेजमेंट में इकोनॉमिक्स और फिक्स्ड इनकम रिसर्च के वाइस प्रेसिडेंट जेरी टेम्पलमैन का कहना है कि अभी से सितंबर की मीटिंग तक कई अहम आंकड़े सामने आएंगे। उनके मुताबिक फेड की स्थिति उस वक्त तक बदल भी सकती है।
यानी सितंबर में जो होगा, वह जरूरी नहीं कि आज जैसा ही हो। तस्वीर आने वाले हफ्तों में और साफ होगी।
आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा
अभी के लिए लोन की EMI, क्रेडिट कार्ड ब्याज और होम लोन की दरों में कोई बदलाव नहीं होगा। जिनके पास पहले से लोन है, उनकी किस्त फिलहाल जस की तस रहेगी।
पर अगर आगे दरें बढ़ती हैं, तो नया लोन लेना महंगा पड़ सकता है। दूसरी तरफ, जो लोग बचत खातों या FD में पैसा रखते हैं, उन्हें ऊंची ब्याज दरों का फायदा मिल सकता है।
नौकरी बाजार पर भी असर की बात करें तो ऊंची दरें आमतौर पर हायरिंग को धीमा करती हैं। यही वजह है कि फेड बहुत सोच-समझकर कदम उठा रहा है।
अगली बैठक कब है?
चेयरमैन वॉर्श की प्रेस कॉन्फ्रेंस भारतीय समयानुसार देर रात होगी (अमेरिकी समय दोपहर 2:30 बजे)। अगली FOMC बैठक सितंबर में तय है, और वहीं तय होगा कि दरें बढ़ेंगी, घटेंगी या फिर जस की तस रहेंगी।
फिलहाल इतना साफ है – फेड के अंदर मतभेद खुलकर सामने आ चुका है। आने वाले महीनों में महंगाई के आंकड़े ही तय करेंगे कि पलड़ा किस तरफ झुकेगा।
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