बिहार सरकार किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीक मुहैया करवाने और कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए अहम फैसला लिया है। किसान अक्सर खेती बाड़ी के कामों के लिए ट्रैक्टर और अन्य दूसरे कृषि यंत्र खरीदने की सोचता तो है, लेकिन माली हालत कमजोर होने की वजह से इन महंगे उपकरणों को खरीद नहीं पाता और पीछे हट जाता हैं? लेकिन अब बिहार सरकार ने छोटे और सीमांत किसानों की इसी समस्या का हल निकालते हुए 1-2 नहीं बल्कि पूरे 86 तरह के कृषि यंत्रों पर SMAM योजना के तहत सब्सिडी देने का फैसला लिया है. आइए जानें क्या है योजना और इसमें आवेदन की पात्रता, अनुदान की राशि से जुड़ी पूरी जानकारी…
किसानों को 86 कृषि यंत्रों पर सब्सिडी के लिए ₹236.58 करोड़ रुपये मंजूर
राज्य सरकार ने चौथे कृषि रोड मैप के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन, यानी SMAM योजना के लिए ₹236.58 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. यह केंद्र प्रायोजित योजना है, और इसका सीधा फायदा राज्य के छोटे-सीमांत किसानों को मिलने वाला है.
योजना के तहत 86 तरह के कृषि यंत्रों पर 40 से 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा. साथ ही राज्यभर में कस्टम हायरिंग सेंटर, कृषि यंत्र बैंक, फसल अवशेष प्रबंधन केंद्र और किसान ड्रोन सेंटर भी खोले जाएंगे.
मतलब साफ है. अब महंगी मशीन खरीदने की ज़रूरत नहीं, किराए पर लेकर भी खेती का काम पूरा हो सकेगा.
कस्टम हायरिंग सेंटर से किसानों को क्या मिलेगा
राज्य में कुल 267 कस्टम हायरिंग सेंटर खोले जाएंगे. हर सेंटर की परियोजना लागत ₹10 लाख तक तय की गई है, जिस पर सरकार 40 प्रतिशत यानी अधिकतम ₹4 लाख की सहायता देगी.
सोचिए, इन सेंटरों से किसान अपनी ज़रूरत के हिसाब से मशीन उठाकर ले जा सकेंगे. न खरीदने का झंझट, न रखरखाव की टेंशन.
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इस पर सीधी बात कही. उनके मुताबिक महंगे कृषि यंत्र खरीदना हर किसान के बस की बात नहीं होती, इसलिए कस्टम हायरिंग सेंटर के ज़रिए किराए पर यंत्र मिलने से खेती की लागत घटेगी और समय की भी बचत होगी.
समूह में खेती करने वालों को 80% तक अनुदान क्यों
यहीं पर योजना का सबसे दिलचस्प हिस्सा आता है. राज्य में 38 कृषि यंत्र बैंक भी बनाए जाएंगे, और इन पर सब्सिडी बाकी सेंटरों से कहीं ज़्यादा है.
हर यंत्र बैंक की परियोजना लागत ₹10 लाख तक होगी. पात्र किसान समूहों को इस पर 80 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा, यानी अधिकतम ₹8 लाख रुपये की मदद.
वजह साफ है. जब कई किसान मिलकर एक यंत्र बैंक चलाते हैं, तो सरकार को भरोसा रहता है कि निवेश का फायदा एक व्यक्ति नहीं, पूरा समूह उठाएगा. इसीलिए सब्सिडी दर यहां सबसे ऊंची रखी गई है.
पराली की समस्या सुलझाने के लिए अलग से 200 केंद्र
पंजाब-हरियाणा में हर साल पराली जलाने को लेकर जो हंगामा मचता है, बिहार सरकार उससे सबक लेती दिख रही है.
फसल अवशेष प्रबंधन के लिए राज्य में 200 विशेष कस्टम हायरिंग सेंटर बनाए जाएंगे. इनकी परियोजना लागत ₹20 लाख तक रखी गई है, और पात्रता के अनुसार 40 से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलेगी. अधिकतम सहायता राशि ₹12 लाख होगी.
इन केंद्रों पर 55 हॉर्सपावर या उससे ज़्यादा क्षमता वाले ट्रैक्टर के साथ-साथ ज़रूरी दूसरे यंत्र भी उपलब्ध कराए जाएंगे. मकसद है, फसल अवशेष को जलाने की बजाय वैज्ञानिक तरीके से निपटाना.
ड्रोन से खेती, कृषि स्नातकों को अलग से फायदा
ड्रोन सेंटर की सब्सिडी में दो स्तर
खेती में ड्रोन का इस्तेमाल अब सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा. राज्य में 480 किसान ड्रोन कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित होंगे.
यहां सब्सिडी की दर आवेदक के हिसाब से अलग-अलग है. कृषि स्नातकों को 50 प्रतिशत, यानी अधिकतम ₹5 लाख का अनुदान मिलेगा. बाकी पात्र आवेदकों के लिए यह दर 40 प्रतिशत, यानी अधिकतम ₹4 लाख तय की गई है.
इन सेंटरों के ज़रिए किसानों को ड्रोन आधारित छिड़काव जैसी आधुनिक सेवाएं आसानी से मिल सकेंगी. आपने भी सोचा होगा कि गांव में ड्रोन जैसी टेक्नोलॉजी कब पहुंचेगी. जवाब है, अब यही योजना उसका रास्ता बना रही है.
साल में दो बार लगेंगे मेले, किसानों को सीधी जानकारी
योजना कितनी भी बड़ी क्यों न हो, अगर किसान तक जानकारी ही न पहुंचे तो फायदा अधूरा रह जाता है. इसी वजह से हर ज़िले में साल में दो बार, दो दिन के कृषि यंत्रीकरण मेले लगाए जाएंगे.
मंत्री सिन्हा के मुताबिक इन मेलों में किसान आधुनिक मशीनों को सीधे देख सकेंगे, विशेषज्ञों से सवाल-जवाब कर सकेंगे और योजनाओं का लाभ लेने की प्रक्रिया भी समझ पाएंगे.
योजना का पूरा गणित
| कैटेगरी | संख्या | अधिकतम प्रोजेक्ट लागत | सब्सिडी | अधिकतम अनुदान |
|---|---|---|---|---|
| कस्टम हायरिंग सेंटर | 267 | ₹10 लाख | 40% | ₹4 लाख |
| कृषि यंत्र बैंक | 38 | ₹10 लाख | 80% (पात्र समूह) | ₹8 लाख |
| फसल अवशेष प्रबंधन केंद्र | 200 | ₹20 लाख | 40-80% | ₹12 लाख |
| किसान ड्रोन सेंटर (स्नातक) | 480 (कुल) | — | 50% | ₹5 लाख |
| किसान ड्रोन सेंटर (अन्य पात्र) | 480 (कुल) | — | 40% | ₹4 लाख |
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किसानों के लिए आगे की सलाह
अगर आप बिहार के छोटे या सीमांत किसान हैं, तो अपने ज़िले में लगने वाले कृषि यंत्रीकरण मेले की तारीख पर नज़र रखें. वहीं से आवेदन प्रक्रिया की पूरी जानकारी मिलेगी.
कस्टम हायरिंग सेंटर हो या ड्रोन सेंटर, हर कैटेगरी में पात्रता की शर्तें अलग हैं. नज़दीकी कृषि विभाग कार्यालय से अपनी कैटेगरी के हिसाब से सही जानकारी ज़रूर पुष्टि कर लें, इससे पहले कि आवेदन की तैयारी शुरू करें.
योजना से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब (FAQs):
योजना के तहत 86 तरह के कृषि यंत्रों पर 40 से 80 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा, कैटेगरी के हिसाब से दर अलग-अलग है.
हर सेंटर की ₹10 लाख तक की परियोजना लागत पर 40 प्रतिशत, यानी अधिकतम ₹4 लाख का अनुदान मिलेगा.
कृषि स्नातकों को 50 प्रतिशत (अधिकतम ₹5 लाख) और अन्य पात्र आवेदकों को 40 प्रतिशत (अधिकतम ₹4 लाख) की सहायता मिलेगी.
पात्र समूहों को यंत्र बैंक पर 80 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा क्योंकि इसका फायदा एक साथ कई किसानों को मिलता है.
वित्तीय वर्ष 2026-27 में सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन, यानी SMAM योजना के लिए ₹236.58 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. यह केंद्र प्रायोजित योजना है.
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