Surya Mitra Krishi Feeder Yojana: भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार से आज मंगलवार यानी 10 जून को एक ऐतिहासिक योजना की शुरुआत होने जा रही है। यह योजना प्रदेश के लाखों किसानों के भविष्य में उजाले की किरण लेकर आ रही है। जी हाँ हम बात कर रहे है ‘सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना’। इस योजना के शुरू होने से किसानों को सिंचाई के लिए सस्ती बिजली तो मिलेगी ही , साथ ही उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर बिजली उत्पादन के क्षेत्र में भी सशक्त भूमिका निभाने का मौका दिया जाएगा ।
राज्य के नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री, श्री राकेश शुक्ला इस योजना को किसानों की आर्थिक ताकत बढ़ाने और राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बता रहे हैं। उनके मुताबिक, “यह योजना छोटे निवेशकों के साथ-साथ हमारे अन्नदाताओं को भी ऊर्जा क्षेत्र में सीधे भागीदार बनाएगी। किसान ‘सूर्य मित्र’ बनकर न केवल अपनी खेती की बिजली जरूरतें पूरी कर सकेंगे, बल्कि अतिरिक्त बिजली बेचकर एक स्थिर आय का स्रोत भी पैदा कर सकेंगे। यह योजना वाकई ‘वोकल फॉर लोकल’ को साकार करने जैसा है।”
किसान अब केवल उपभोक्ता नहीं, ऊर्जा उत्पादक भी बनेंगे
प्रदेश सरकार की यह योजना केवल ऊर्जा संकट का हल नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक सशक्त कदम है। ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने बताया कि किसानों को सौर ऊर्जा से खेतों की सिंचाई करने के साथ-साथ अब बिजली उत्पादन कर सरकार को 25 वर्षों तक बेचने का भी अवसर मिलेगा। इससे वे न केवल आत्मनिर्भर बनेंगे बल्कि आर्थिक रूप से भी सशक्त होंगे।
ऊर्जा के क्षेत्र में ‘वोकल फॉर लोकल’
‘सूर्य मित्र योजना’ का दायरा केवल किसान तक सीमित नहीं है। यह योजना स्थानीय निवेशकों, युवाओं और स्टार्टअप्स के लिए भी नए द्वार खोल रही है। सब-स्टेशनों की 100% क्षमता तक सोलर प्रोजेक्ट लगाने की मंजूरी दी गई है, जिससे छोटे-छोटे उद्यमियों को भी रोजगार और निवेश के अवसर मिलेंगे। यह ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को सजीव करता है।
पीएम कुसुम योजना का विस्तार, अब दिन में मिलेगी बिजली
मध्यप्रदेश देश का कृषि प्रधान राज्य है। यहां लगभग 35 लाख कृषि पंप 8000 से अधिक कृषि फीडर्स से जुड़े हुए हैं। इनमें से अधिकतर डीजल या ग्रिड से संचालित होते हैं, जिससे सिंचाई महंगी पड़ती है। अब ग्रिड से जुड़े इन फीडर्स पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जाएंगे ताकि किसानों को दिन में ही बिजली मिल सके- सुरक्षित, स्वच्छ और सस्ती।
बिजली की बर्बादी रुकेगी, सब-स्टेशनों का भार घटेगा
इस योजना का एक बड़ा लाभ यह है कि बिजली की ट्रांसमिशन हानि और लो-वोल्टेज जैसी समस्याएं काफी हद तक नियंत्रित होंगी। 33/11 केवी के उप-केन्द्रों पर ओवरलोडिंग कम होगी और सब-स्टेशनों पर तुरंत सुधार की जरूरत भी घटेगी। यानि, पूरी बिजली प्रणाली ज़्यादा स्थिर और किफायती हो जाएगी।
किसानों के लिए क्यों है खास?
- दिन में सिंचाई की गारंटी: अब तक किसान अक्सर रात के समय बिजली पर निर्भर रहते थे। इस योजना से फीडर स्तर पर सीधे सौर ऊर्जा मिलेगी, जिससे दिन के समय भी सिंचाई के लिए सस्ती और निर्बाध बिजली मुहैया होगी। इससे उनकी जीवनशैली भी व्यवस्थित होगी।
- बिजली बेचकर अतिरिक्त आय: किसान या उनके समूह, या स्थानीय उद्यमी इन सोलर प्लांट्स में निवेश कर सकेंगे। वे जितनी बिजली उत्पादित करेंगे, उसमें से अपनी जरूरत के बाद बची बिजली को सरकार को बेचकर लगातार आमदनी कमा सकेंगे। यानी, किसान सिर्फ उपभोक्ता नहीं, उत्पादक भी बनेंगे।
- स्थानीय स्तर पर रोजगार: इस योजना के क्रियान्वयन से सोलर पैनल लगाने, रखरखाव और प्रबंधन के क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे, जो ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को मजबूत करेगा।
राज्य सरकार को भी लाभ
इस योजना से केवल किसान ही नहीं, बल्कि पूरे बिजली तंत्र को कई स्तरों पर फायदा होगा:
- सब्सिडी का बोझ घटेगा: एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी को कम दर पर बिजली मिलेगी, जिससे कृषि क्षेत्र को दी जाने वाली बिजली सब्सिडी के वित्तीय दबाव में कमी आएगी।
- ग्रिड को राहत: सीधे फीडर स्तर पर बिजली आपूर्ति से लंबी दूरी के ट्रांसमिशन में होने वाली ऊर्जा की हानि (लॉस) कम होगी। साथ ही, सब-स्टेशनों पर ट्रांसफार्मर के ओवरलोड, लो वोल्टेज और बिजली कटौती की समस्याओं में भी कमी आएगी।
- ग्रिड स्थिरता: सौर ऊर्जा से मिलने वाली बिजली ग्रिड की स्थिरता को बनाए रखने में भी मददगार होगी।
आगे का रास्ता
इस महत्वाकांक्षी योजना को गति देने के लिए आज 10 जून, मंगलवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में एक राज्य स्तरीय समिट आयोजित किया जाएगा। यहां योजना के विस्तृत ब्यौरे, निवेश के अवसरों और क्रियान्वयन की रणनीति पर चर्चा होगी।
मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम ने पहले ही सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना के तहत लगभग 2.45 लाख पंपों के सोलराइजेशन सहित परियोजनाओं के लिए निविदाएं (टेंडर) जारी कर दी हैं। इन परियोजनाओं को एग्रीकल्चर इन्फ्रा फंड से 7 साल तक महज 3% ब्याज दर पर ऋण सुविधा का लाभ भी मिलेगा। पीएम कुसुम के तहत 1200 मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं के लिए सरकारी अनुदान का विकल्प भी उपलब्ध होगा।
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