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कपास की खेती में नया संकट: BT Cotton बीज की कीमतों में बढ़ोतरी, जाने कितना हुआ महंगा

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BT Cotton Seed Price: “कपास पट्टी” के नाम से विख्यात श्रीगंगानगर जिले समेत अन्य कपास उत्पादक किसानों के लिए इस बार बीटी कॉटन बीजों (BT Cotton Seed) की कीमतें बढ़ने से अतरिक्त आर्थिक भार पड़ने वाला है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय की हालिया अधिसूचना के अनुसार साल वर्ष 2025-26 के लिए बीटी कॉटन बीजों की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है, जिससे हज़ारों किसानों की आर्थिक चिंताएं बढ़ गई हैं। यह निर्णय न सिर्फ खेती की लागत बढ़ाएगा, बल्कि पहले से घट रही पैदावार और कीटों के प्रकोप के बीच किसानों के संघर्ष को और गहरा सकता है।

बीजी-द्वितीय की कीमत में 4.2% की वृद्धि

केंद्र सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए बीटी कॉटन बीजों की अधिकतम विक्रय कीमत तय की है। बीजी-प्रथम प्रकार के 475 ग्राम के पैकेट की कीमत 635 रुपये पर स्थिर रखी गई है, जबकि बीजी-द्वितीय की कीमत 864 रुपये से बढ़ाकर 901 रुपये कर दी गई है। कृषि विभाग के सेवानिवृत्त उपनिदेशक मिलिंद सिंह के अनुसार, “यह बढ़ोतरी छोटी लग सकती है, लेकिन जब एक हेक्टेयर में 4-5 पैकेट खर्च होते हैं, तो किसानों का बजट डगमगा जाता है।”

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किसानों पर दोहरी मार

इस वर्ष की सबसे बड़ी समस्या यह है कि राजस्थान सरकार ने अभी तक खरीफ सीजन के लिए बीटी कॉटन बीज उत्पादक कंपनियों की पंजीकरण प्रक्रिया या किस्मों की अनुमोदन सूची जारी नहीं की है। इस अनिश्चितता के कारण किसान न तो बीज खरीद पा रहे हैं और न ही बुवाई की योजना बना पा रहे हैं। अखिल भारतीय किसान सभा के जिलाध्यक्ष कालू थोरी इस स्थिति को “किसानों के साथ खिलवाड़” बताते हैं।

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गुलाबी सुंडी से पैदावार घटी

कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। पिछले एक दशक में भारत में कपास की पैदावार (लिंट) प्रति हेक्टेयर 510 किलो से गिरकर 437 किलो रह गई है। श्रीगंगानगर के किसान गुरलाल सिंह बराड़ बताते हैं, “गुलाबी सुंडी का हमला इतना बढ़ गया है कि कीटनाशकों पर होने वाला खर्च अब मुनाफे को खा जाता है।” विडंबना यह है कि बीज कंपनियाँ गुणवत्ता में सुधार के बजाय कीमतें बढ़ा रही हैं।

कॉटन बुवाई का रकबा घटा

कृषि अर्थशास्त्री डॉ. राजेश्वरी शर्मा के अनुसार, “बीटी कॉटन की सफलता अब संदिग्ध है। 2024-25 में श्रीगंगानगर में कपास का रकबा 2.5 लाख हेक्टेयर रह गया, जो पिछले साल 4.2 लाख हेक्टेयर था। यह गिरावट सरकार को बीज नीति और सब्सिडी ढांचे में बदलाव के लिए मजबूर करनी चाहिए।”

वर्षबुवाई हेक्टेयर में
2021-223,04564
2022-233,62,909
2023-244,20,540
2024-252,50,376

स्रोत : कृषि विभाग, श्रीगंगानगर।

किसानों की सरकार से अपील

किसान गुरलाल सिंह कहते हैं, “हमारी मेहनत का फल बीज कंपनियों की जेब में नहीं जाना चाहिए।” पिछले दो वर्षों में नरमा कपास पर कीटों का प्रकोप बढ़ा है। वहीं अब केंद्र सरकार ने बीज कंपनियों के दबाव में किसानों पर बोझ डालने का काम कर दिया। ऐसे में स्थानीय किसान संघों ने सरकार से तत्काल दो कदम उठाने की मांग की है।

पहला:- बीज कीमतों में वृद्धि का निर्णय वापस लिया जाए, और

दूसरा:- बीज गुणवत्ता नियंत्रण के लिए एक स्वतंत्र समिति बनाई जाए।

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जगत पाल पिछले 8 वर्षों से एक पेशेवर ब्लॉगर हैं। वे शिक्षा, ऑटो, कृषि समाचार, मंडी भाव, गैजेट्स और बिजनेस जैसे विषयों पर विशेषज्ञता रखते हैं। वर्तमान में वे news.emandirates.com के संपादक और प्रमुख लेखक हैं, जहाँ वे भरोसेमंद और जानकारीपूर्ण कंटेंट प्रदान करते हैं।