Fake Fertilizer News: राजस्थान में कृषि विभाग की बड़ी कार्रवाई ने एक बार फिर नकली खाद (Fake Fertilizer) और बीज बनाने वालों की नींद उड़ा दी है। हाल ही में राज्य के कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा की सख्ती के बाद विभाग ने ज़मीन पर उतरकर कई नामी बीज फैक्ट्रियों और आदान फर्मों पर शिकंजा कसा। सोमवार 16 जून को हनुमानगढ़ जिले में ताबड़तोड़ छापों से हड़कंप मच गया।
सैंपल में साजिश की बू: रसायनों के नमूने जांच के लिए भेजे गए
जयपुर से आए क्वालिटी कंट्रोल के संयुक्त निदेशक केके मंगल ने खुद मोर्चा संभालते हुए चार टीमें बनाई और अलग-अलग ठिकानों पर भेजीं। जांच में दो बड़ी फैक्ट्रियों में भारी अनियमितताएं पाई गईं। सिरोड सीड्स एंड केमिकल्स पर तो 27 उत्पादों की बिक्री पर सीधे रोक लगा दी गई और 15,346 लीटर कीटनाशक भी 30 दिन के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया। इस दौरान रसायन के दो सैंपल लिए गए और फैक्ट्रियों के गोदामों में घंटों जांच पड़ताल चली।
जंक्शन के रीको क्षेत्र में स्थित नूटरी वर्ल्ड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट पर भी छापा पड़ा, जहां कृषि अधिकारी सरोज ने निरीक्षण कर सैंपल भरे। टीम को कुछ गड़बड़ियां भी देखने को मिलीं, जो अब लैब जांच के बाद साफ होंगी।
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टाउन में भी टूटा ताला: नामी फर्मों की जांच से खुल रहे राज़
इधर टाउन इलाके में भी कृषि विभाग की टीमें पूरी चौकसी के साथ सक्रिय रहीं। उपनिदेशक डॉ. रमेश बराला और सुभाषचंद्र डूडी ने अष्टम सीड्स और नंदन फर्टिलाइज़र जैसे प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। ताराचंद-राजेश कुमार के प्रतिष्ठान से भी बीजों के सैंपल लिए गए। खुद संयुक्त निदेशक केके मंगल हर लोकेशन पर पहुंचे और कार्रवाई की मॉनिटरिंग की। विभाग ने संकेत दिया है कि ऐसी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
रावतसर में बिफरे किसान: दो घंटे तक हाईवे किया जाम
नकली डीएपी खाद की शिकायतों ने रावतसर में किसानों में भारी गुस्सा देखने को मिला । अखिल भारतीय किसान सभा के बैनर तले अनाज मंडी में एक महापंचायत हुई, जिसके बाद गुस्साए किसानों ने दो घंटे तक मेगा हाईवे पर चक्का जाम कर दिया।

सभा में भादरा के पूर्व विधायक बलवान पूनियां ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा—“यह सब मिलीभगत का नतीजा है।” मंगेज चौधरी और ओम जांगू ने भी प्रशासन और कृषि अधिकारियों पर मिलावटखोरी को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, नकली खाद के हजारों बोरे खुलेआम बिके और अधिकारियों ने आंखें मूंद लीं।
किसान नेताओं ने दिया अल्टीमेटम
महापंचायत में यह साफ कर दिया गया कि अगर प्रशासन ने जल्द स्पष्ट कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन और तेज़ किया जाएगा। किसानों का भरोसा अब अधिकारियों पर नहीं, कार्रवाई की पारदर्शिता पर टिका है। इस बीच अधिकारियों और किसान नेताओं की बैठक में क्या सहमति बनती है, उस पर सबकी नजरें टिकी हैं।
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