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खाने का तेल होगा सस्ता! सरकार ने खाद्य तेलों के आयात शुल्क में 10% की कटौती, जनता को मिलेगी सीधी राहत

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Import Duty on Edible Oils : चूल्हे-चौके की बढ़ती महंगाई से जूझ रहे आम भारतीय परिवारों के लिए राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार ने एक अहम फैसले में खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में भारी कटौती कर दी है। यह कदम घरेलू बाजार में सरसों से लेकर सोयाबीन तक, कई खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और उपभोक्ताओं को सीधी राहत पहुंचाने के मकसद से उठाया गया है। सरकार ने खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में की 10% की कटौती

गुरुवार, 30 मई को लिए गए इस निर्णय के तहत, कच्चे पाम तेल, कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे सूरजमुखी तेल पर लगने वाले बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) में 10 प्रतिशत की कमी की गई है। यह संशोधन शुक्रवार, 31 मई से ही प्रभावी हो गया। याद रहे कि भारत अपनी कुल वनस्पति तेल जरूरतों का लगभग दो-तिहाई हिस्सा आयात पर निर्भर है। पाम तेल इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड से आता है, जबकि सोयाबीन और सूरजमुखी तेल की आपूर्ति अर्जेंटीना, ब्राजील, रूस और यूक्रेन जैसे देशों से होती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर यहां के बाजार और रसोई के बजट पर पड़ता है।

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कितनी हुई कमी? आंकड़ों में समझें

  • पिछले कुछ महीनों में इन कच्चे तेलों पर बेसिक आयात शुल्क पहले ही 20% से घटाकर 10% कर दिया गया था।
  • नवीनतम 10% की इस कटौती के बाद, इन तीनों प्रमुख कच्चे तेलों पर कुल आयात शुल्क अब घटकर मात्र 16.5% रह जाएगा।
  • यह कुल शुल्क बेसिक ड्यूटी के अलावा कृषि अवसंरचना एवं विकास सेस (AIDC) और सामाजिक कल्याण अधिभार (SWS) को मिलाकर बनता है।

उपभोक्ताओं को मिलेगा सीधा लाभ, बाजार पर क्या पड़ेगा असर?

विशेषज्ञों और उद्योग जगत का मानना है कि खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में यह कटौती घरेलू बाजार में दिखाई देने वाली है। आयातित तेल के सस्ता होने से देश भर में खुदरा दुकानों पर तेल की कीमतों में नरमी आने की उम्मीद है। इसका सबसे बड़ा फायदा आम उपभोक्ता को मिलेगा, जो पिछले कुछ समय से महंगाई के दबाव में हैं। कीमतें कम होने से मांग बढ़ने की भी संभावना है। साथ ही, घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए इन तेलों के आयात में भी इजाफा हो सकता है।

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सरकार का रुख

यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने खाद्य तेलों की कीमतों को संतुलित करने के लिए आयात शुल्क में बदलाव किया है। सितंबर 2024 में, सरकार ने कच्चे और रिफाइंड वनस्पति तेलों पर बेसिक सीमा शुल्क बढ़ाकर 20% कर दिया था। उस समय कच्चे तेलों पर कुल शुल्क 27.5% हो गया था। हालांकि, बाद में कीमतों पर नजर रखते हुए इसमें क्रमिक रूप से छूट दी गई। इस नवीनतम कदम को सरकार की उस सतत कोशिश के तहत देखा जा रहा है, जहां आम जनता के कल्याण और खाद्य मुद्रास्फीति पर नियंत्रण सर्वोच्च प्राथमिकता है। रिफाइंड तेलों पर अभी भी 35.75% का भारी शुल्क लगता है।

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जगत पाल पिछले 8 वर्षों से एक पेशेवर ब्लॉगर हैं। वे शिक्षा, ऑटो, कृषि समाचार, मंडी भाव, गैजेट्स और बिजनेस जैसे विषयों पर विशेषज्ञता रखते हैं। वर्तमान में वे news.emandirates.com के संपादक और प्रमुख लेखक हैं, जहाँ वे भरोसेमंद और जानकारीपूर्ण कंटेंट प्रदान करते हैं।