Join WhatsApp Channel

देश–दुनिया की खबरें तुरंत पाने के लिए हमारे व्हाट्सऐप चैनल से जुड़ें

Join on WhatsApp
ताज़ा खबरें:
Home » खबरें » किसानों ने किया हाईवे जाम: जमीन मुआवजे में भेदभाव को लेकर किसानों ने पूछा – “हमारी ज़मीन सस्ती क्यों?”

किसानों ने किया हाईवे जाम: जमीन मुआवजे में भेदभाव को लेकर किसानों ने पूछा – “हमारी ज़मीन सस्ती क्यों?”

Jagat Pal

Google News

Follow Us

Advertisement

छतरपुर (मध्य प्रदेश) छतरपुर जिले में सैंकड़ों की तादाद में किसानों का गुस्सा सड़क पर देखने को मिला । नेशनल हाईवे-34 पर अचानक सैकड़ों किसान इकट्ठा हो गए और सड़क पर बैठकर जाम लगा दिया। कोई नारा नहीं, कोई हिंसा नहीं—सिर्फ़ सवाल था, “हमारी ज़मीन की कीमत इतनी कम क्यों है?”

दरअसल, छतरपुर जिले से होकर गुजर रहा सागर-कानपुर फोर लेन हाईवे निकाला जा रहा है। लेकिन इस विकास की कीमत उन किसानों से ली जा रही है, जिनकी पुश्तैनी ज़मीनें इस निर्माण कार्य में अधिग्रहीत कर ली गई हैं—और बदले में मुआवजा मिला, सिर्फ नाम मात्र का।

Advertisement

“यूपी में 4 लाख, एमपी में सिर्फ 1 लाख – क्या यही न्याय है?”

प्रदर्शन कर रहे किसानों ने बताया कि सागर-कानपुर फोर लेन हाईवे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश, दोनों राज्यों से होकर गुजरता है। मगर जब मुआवजे की बात आई तो मानो राज्यों की सीमाएं किसानों के हक़ भी तय करने लगीं।

Advertisement

किसानों का कहना है कि एमपी में उन्हें एक बीघा जमीन के बदले महज ₹1 लाख से ₹1.25 लाख तक दिया जा रहा है। वहीं, यूपी के सीमा से सटे गांवों में यही जमीन ₹3 से ₹4 लाख प्रति बीघा तक में अधिग्रहीत की गई है। यह भेदभाव उन्हें अंदर तक तोड़ रहा है।

दोनों राज्यों में भूमि अधिकरण के आंकड़े :

  • एमपी: 1.25 लाख/बीघा
  • यूपी: 3-4 लाख/बीघा
    (किसान संघर्ष समिति के दावे अनुसार)

हाईवे पर लगा जाम, मौके पर पहुंचे अधिकारी

नेशनल हाईवे-34 जाम होते ही अफसरों की नींद टूटी। गढ़ी मलहरा पुलिस, तहसीलदार और जिले के अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। समझाइश का दौर चला, मगर किसानों की मांग साफ़ थी – मुआवजा चाहिए, वो भी समान अधिकारों के साथ।

किसानों ने यह भी कहा कि हाईवे के कारण ज़मीनों के दाम आसमान छूने लगे हैं, ऐसे में कम मुआवजा देना न केवल अन्याय है, बल्कि ज़मीनी सच्चाई से मुंह मोड़ना है।

“विकास की कीमत कोई और क्यों चुकाए?”

इस पूरी घटना ने एक गंभीर सवाल उठा दिया है — विकास का रास्ता क्या हमेशा किसानों के खेतों से होकर ही क्यों गुजरता है? और अगर गुजरता है, तो क्या उनकी कीमत सिर्फ आंकड़ों में गिनी जाएगी?

करीब दो घंटे चले इस शांतिपूर्ण मगर तीखे विरोध के बाद तहसीलदार के आश्वासन पर किसानों ने चक्काजाम खत्म किया। पर वे यह साफ कर चुके हैं कि अगर मांगें नहीं मानी गईं, तो अगली बार सिर्फ़ सड़कें नहीं जाम होंगी, आवाज़ें बुलंद होंगी।

SDM ने क्या आश्वसन दिया किसानों को ?

नौगांव SDM जीएस पटेल से मुआवजा को लेकर बात की गई तो उन्होंने कहा, ” जिन किसानों को लग रहा उनका मुआवजा कम है। वह छतरपुर कलेक्टर के पास अपनी आपत्ति लगा सकते हैं। किसानों के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा, नियम अनुसार मुआवजा मिलेगा.”

ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए आप हमारे Whatsapp Channe को भी JOIN कर सकते है 👉 यहाँ जुड़ें

Advertisement

इस पोस्ट को शेयर करें:

जगत पाल पिछले 8 वर्षों से एक पेशेवर ब्लॉगर हैं। वे शिक्षा, ऑटो, कृषि समाचार, मंडी भाव, गैजेट्स और बिजनेस जैसे विषयों पर विशेषज्ञता रखते हैं। वर्तमान में वे news.emandirates.com के संपादक और प्रमुख लेखक हैं, जहाँ वे भरोसेमंद और जानकारीपूर्ण कंटेंट प्रदान करते हैं।