Paush Amavasya 2025- अगर आपने अभी तक पौष अमावस्या की तैयारी नहीं की है, तो जल्दी करिए। कल यानी शुक्रवार 19 दिसंबर को साल की आखिरी अमावस्या है, कल का यह दिन न सिर्फ पितरों के लिए समर्पित है, बल्कि इस बार दो ऐसे खास खगोलीय संयोग बन रहे हैं जो इसे दशकों में सबसे शक्तिशाली बना देंगे। पहली खास बात – ये पौष अमावस्या खरमास में पड़ रही है। दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण संयोग, धनु राशि में सूर्य और मंगल की युति से Mangal Aditya Yoga बन रहा है, जो चार विशिष्ट राशियों के लिए लाभकारी साबित होगा। आइए समझते हैं कि यह दिन आपके जीवन में क्या बदलाव ला सकता है और कैसे आप इसका पूरा लाभ उठा सकते हैं।
पौष अमावस्या कब है? समय और महत्व २०२५
हिंदू धर्म में Paush Amavasya का विशेष धार्मिक महत्व है। पौष मास को छोटा पितृ पक्ष भी कहा जाता है। इस साल यह अमावस्या 19 दिसंबर की सुबह 5 बजे से शुरू हो जाएगी और 20 दिसंबर की सुबह 7 बजकर 12 मिनट पर समाप्त होगी। यानी आपके पास लगभग 26 घंटे का समय होगा पितृकर्म करने के लिए।
इस दिन स्नान-दान का विशेष महत्व है और इसका सही समय सुबह 7:09 से 11:01 बजे तक है। अगर आप पितरों का तर्पण, श्राद्ध या पिंडदान करना चाहते हैं, तो सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 11:30 से दोपहर 2:30 बजे के बीच है। इस दौरान किए गए कर्मों का फल कई गुना बढ़ जाता है।
कौन सी 4 राशियां होंगी सबसे ज्यादा लाभान्वित? जानें अपना हाल
Mangal Aditya Yoga का असर सभी 12 राशियों पर पड़ेगा, लेकिन 4 राशियां ऐसी हैं जो इसका सीधा और तत्काल लाभ उठा सकेंगी।
मेष राशि: आर्थिक मोर्चे पर बड़ी जीत
मेष राशि वालों के लिए ये दिन बेहद खास रहने वाला है। आर्थिक मामलों में सुधार के साफ संकेत हैं। अचानक कहीं से पैसा आ सकता है – हो सकता है पुराना कर्ज वापस आ जाए या किसी अपेक्षित स्रोत से धन प्राप्त हो। जो योजनाएं लंबे समय से अटकी हुई थीं, वो आगे बढ़ेंगी। नई संपत्ति, घर, फ्लैट या वाहन खरीदने का सपना साकार हो सकता है। स्वास्थ्य सामान्य से बेहतर रहेगा, बशर्ते आप खान-पान पर ध्यान दें। एक सलाह – भाई-बहनों के साथ संबंध मधुर रखने के लिए थोड़ा अतिरिक्त प्रयास करना होगा, लेकिन ये प्रयास आपको आगे बहुत फायदा पहुंचाएगा।
सिंह राशि: धन-संपत्ति में बंपर बढ़ोतरी
सिंह राशि वालों के लिए ये पौष अमावस्या धन-संपत्ति में बंपर बढ़ोतरी लेकर आएगी। आय बढ़ने के साथ-साथ खर्चों पर भी नियंत्रण रहेगा, जिससे बैंक बैलेंस मजबूत स्थिति में आएगा। व्यापार में अच्छा लाभ मिल सकता है। अगर आप नौकरीपेशा हैं, तो कार्यस्थल पर सहयोग की भावना से काम करना बेहद फायदेमंद साबित होगा। एक चेतावनी – जिद और अहंकार से बचना होगा। रिश्तों में सुधार आएगा और सामाजिक स्तर पर परिवार की प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
तुला राशि: व्यापारियों के लिए गोल्डन चांस
तुला राशि वालों, खासकर जो व्यापार से जुड़े हैं, ये समय बहुत लाभकारी सिद्ध हो सकता है। पैतृक संपत्ति से लाभ के संकेत हैं। खर्चे कम होंगे और मुनाफा बढ़ेगा। आपकी कार्यप्रणाली में सकारात्मक बदलाव आएगा। कामकाज में मित्रों का सहयोग मिलेगा। मेहनत करने वालों को लगातार अच्छे समाचार मिलेंगे। सबसे बड़ी बात – पति-पत्नी के बीच रिश्ता पहले से ज्यादा मजबूत होगा, जो घर में सकारात्मक ऊर्जा लाएगा।
धनु राशि: अटका धन वापसी के योग
धनु राशि वालों के लिए कारोबार संवर पर रहेगा। आय के नए स्रोत बन सकते हैं और अनावश्यक खर्च घटेंगे। सबसे बड़ी राहत ये कि कहीं से अटका हुआ धन मिलने की संभावना है। चोट, दुर्घटना आदि से बचाव होगा और आप जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लेंगे, जो बहुत बड़ी बात है। स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही न करें और रोगों से सतर्क रहें। परिवार की ओर से आपके प्रयासों को पूरा सहयोग प्राप्त होगा।
पितृ दोष निवारण: क्यों जरूरी है और कैसे करें?

अगर आपकी कुंडली में Pitru Dosh है, तो इस पौष अमावस्या पर तर्पण करना आवश्यक माना जाता है। पितृ दोष तब होता है जब पितरों की आत्मा संतुष्ट नहीं होती, जिससे वंशजों को कई समस्याएं झेलनी पड़ सकती हैं। इससे निजात पाने के लिए आप ये उपाय कर सकते हैं:
पहला, तांबे के लोटे में जल, लाल फूल और लाल रोली डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें। ये सरल सा उपाय पितृ दोष को कम करने में बहुत कारगर माना जाता है। दूसरा, अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष पर जल अर्पित करना विशेष फलदायी होता है। पीपल को पितरों का वास माना जाता है, इसलिए इससे उनकी आत्मा को शांति मिलती है।
तीसरा, पौष अमावस्या के अवसर पर पितृ स्तोत्र और पितृ कवच का पाठ करना चाहिए। इससे पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। चौथा, ब्राह्मणों को भोजन कराना शुभ माना गया है, जिससे पितर प्रसन्न होते हैं और कृपा बनाए रखते हैं।
स्नान-दान का सही समय: मुहूर्त की गणना
सुबह 5:19 से 6:14 तक ब्रह्म मुहूर्त है, जो सभी शुभ कार्यों के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। स्नान-दान के लिए 7:09 से 11:01 तक का समय सबसे उपयुक्त है। लेकिन अगर आप पितृ तर्पण करना चाहते हैं, तो 11:30 से 2:30 बजे के बीच का समय सुनिश्चित करें।
चौघड़िया मुहूर्त: हर कार्य के लिए शुभ समय
अलग-अलग कार्यों के लिए अलग-अलग मुहूर्त हैं:
- चर-सामान्य मुहूर्त: 7:09 AM से 8:26 AM (रोजमर्रा के काम)
- लाभ-उन्नति मुहूर्त: 8:26 AM से 9:43 AM (व्यापारिक कार्य)
- अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: 9:43 AM से 11:01 AM (सबसे शुभ, कोई भी कार्य)
- अभिजीत मुहूर्त: 11:58 AM से 12:39 PM (जीत के कार्य)
- विजय मुहूर्त: 2:02 PM से 2:43 PM (कानूनी/प्रतियोगिता)
- अमृत काल: 1:03 PM से 2:50 PM (ध्यान, पूजा)
पौष अमावस्या पर ये 5 चीजें जरूर करें दान
दान का विशेष महत्व है और इस दिन विशेष चीजें दान करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है।
1. कंबल और गर्म कपड़े पौष का महीना बहुत ठंडा होता है। गरीब या जरूरतमंद लोगों को कंबल, ऊनी कपड़े या स्वेटर दान करना बहुत पुण्यकारी माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार ऐसा दान करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं, जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और मन को शांति मिलती है। ये दान सीधे मानवता की सेवा है।
2. काला तिल और गुड़ अमावस्या के दिन पितरों की पूजा का विशेष महत्व होता है और पौष मास सूर्य देव से जुड़ा होता है। इस दिन काले तिल और गुड़ का दान बहुत फलदायी माना जाता है। काले तिल दान करने से शनि दोष के बुरे प्रभाव कम होते हैं और पितरों का आशीर्वाद मिलता है। गुड़ का दान करने से सूर्य मजबूत होता है, जिससे मान-सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ती है।
3. खिचड़ी और घी अमावस्या के दिन घी का दान करने से सौभाग्य बढ़ता है। वहीं पौष मास में खिचड़ी का दान बहुत शुभ माना गया है। खिचड़ी चावल और दाल से बनती है, जो चंद्रमा और शनि दोनों को शांत करती है। इससे घर में अन्न की बर्कत बनी रहती है।
4. चांदी और पानी पितरों के नाम पर पानी का दान करना या पानी की प्याऊ लगवाना बहुत पुण्य का काम है। इसके साथ यदि संभव हो तो चांदी की छोटी वस्तु दान करना भी शुभ माना जाता है। चांदी चंद्रमा से जुड़ी होती है, जो मन का कारक है। इससे तनाव कम होता है और सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।
5. सात प्रकार के अनाज पौष अमावस्या पर सात तरह के अनाज (जैसे गेहूं, चावल, दाल, बाजरा आदि) का दान करना बहुत शुभ होता है। इसे सप्तधान्य दान कहा जाता है। इससे घर में अन्न और धन की कमी नहीं होती। अगर काम बार-बार अटक रहा हो या व्यापार में नुकसान हो रहा हो, तो यह दान भाग्य के द्वार खोल सकता है।
तर्पण और पूजा की पूरी विधि
अगर आप पहली बार पितृ पूजन कर रहे हैं, तो ये स्टेप्स फॉलो करें:
सुबह 5 बजे उठें और स्नान करें। साफ कपड़े पहनकर पूजा स्थान पर बैठें। तांबे के लोटे में गंगाजल, लाल फूल और रोली मिलाएं। इसे सूर्यदेव को अर्पित करें। फिर पीपल के पेड़ की परिक्रमा करें और जल चढ़ाएं। घर में ब्राह्मण को भोजन कराएं और दक्षिणा दें। अंत में सात प्रकार के अनाज का दान अपनी क्षमता के अनुसार करें।
खरमास का प्रभाव: क्यों है ये अमावस्या और खास?
खरमास में पड़ने वाली ये अमावस्या इसलिए खास है क्योंकि इस दौरान धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व होता है। खरमास में सूर्य की स्थिति ऐसी होती है जो पितृ कर्म को अधिक प्रभावी बना देती है। इसलिए इस दिन किया गया हर दान, हर तर्पण सौ गुना फलदायी माना जाता है।
ज्योतिषीय विश्लेषण: सूर्य-मंगल की युति क्या लाएगी?
धनु राशि में सूर्य और मंगल की युति Mangal Aditya Yoga बना रही है। ये योग ऊर्जा, साहस और कार्य क्षमता का प्रतीक है। साथ ही ये पितृ कर्म को और अधिक शक्तिशाली बना देता है। इस योग में किया गया कोई भी कर्म तुरंत फल देता है, इसलिए अगर आपने पितरों के लिए कुछ वादा किया है, तो इस दिन उसे पूरा जरूर करें।
क्या न करें इस अमावस्या पर?
- किसी से झगड़ा या वाद-विवाद न करें
- मांस-मदिरा का सेवन न करें
- काले रंग के कपड़े न पहनें
- रात को बाहर न जाएं
- कर्ज लेने या देने से बचें
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)
Advertisement






