राजस्थान के सुदूर गांवों में रहने वाले उन बीपीएल परिवारों (BPL families) के लिए एक नई सुबह की शुरुआत होने जा रही है, जिनके जीवन में अब तक सिर्फ अभावों की कहानियाँ थीं। प्रदेश सरकार ने ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय गरीबी मुक्त गांव योजना’ के तहत करौली जिले के 122 गांवों को गरीबी उन्मूलन मिशन में शामिल किया है। इस सरकारी योजना से अब प्रदेश की भजनलाल सरकार इन गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने जा रहे है।
300 करोड़ की बड़ी पहल, 1 लाख की सीधी मदद
इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत राज्य सरकार (Rajasthan government) ने 300 करोड़ रुपए का बजट तय किया है। योजना में प्रत्येक BPL (गरीबी रेखा से नीचे) परिवार को 1 लाख रुपए की आर्थिक सहायता (Financial Assistance) दी जाएगी। इस सहायता राशि से इन ग़रीब परिवारों को स्वरोजगार शुरू करने, छोटे व्यवसाय खड़े करने और आत्मनिर्भर बनने में सहायता मिल सकेगी ।
शिक्षा से स्वास्थ्य तक, हर पहलू पर ध्यान
योजना का क्रियान्वयन चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। पहले चरण में प्रदेश के 5,000 गांवों को इस अभियान में शामिल किया गया है, जिनमें करौली जिले के 122 गांव भी हैं। सरकार का फोकस सिर्फ आर्थिक मदद पर नहीं है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई, घर की स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं और स्थायी आजीविका के अवसरों पर भी रहेगा।
सबसे खास बात यह है कि 5 से 14 वर्ष की उम्र के बच्चों का स्कूल में नामांकन सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि भविष्य की पीढ़ी शिक्षा की रोशनी से अंधकार को मात दे सके।
“किसी को भी योजनाओं से वंचित नहीं रहने देंगे”
पंचायत समिति, नादौती के विकास अधिकारी ऋषिराज मीणा ने बताया कि चयनित गांवों में विशेष कमेटी द्वारा सर्वे किया जा रहा है। जो परिवार अब तक सरकारी योजनाओं से वंचित रहे हैं, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।
करौली, हिंडौन सिटी, टोडाभीम, नादौती, मासलपुर, मंडरायल और सपोटरा जैसे क्षेत्रों के 122 गांवों में 921 बीपीएल परिवार इस योजना से सीधे लाभान्वित होंगे। नादौती तहसील के रामधनकापुरा, खोहरी, पालड़ी और ककड़ा की ढाणी जैसे छोटे-से गांवों के लिए यह योजना एक नई उम्मीद लेकर आई है।
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