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Economic Survey 2026: यूरिया महंगी होगी? सब्सिडी सीधे किसानों के खाते में! जानें क्या है सरकार का प्लान

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Urea Subsidy News : किसान भाइयों, केंद्र सरकार द्वारा गुरुवार को पेश Economic Survey में आपके लिए मिली-जुली खबर निकालकर सामने आई है। सरकार द्वारा 2025-26 के लिए यूरिया की कीमतों में ‘मामूली बढ़ोतरी’ का प्रस्ताव है, लेकिन इसके साथ ही Subsidy Policy में ऐसा बदलाव आ सकता है जो आपकी जेब और जमीन दोनों को प्रभावित करेगा। अभी 45 किलो का बैग आपको 242 रुपये में मिलता है, यह दर मार्च 2018 से बरकरार है। लेकिन अब सरकार सोच रही है कि Urea Subsidy की राशि सीधे उत्पादक कंपनियों को न देकर किसानों के बैंक खाते में ट्रांसफर करे, और वह भी प्रति एकड़ के हिसाब से। किसान भाइयों ऐसे में जो सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है वो ये कि…क्या यह सिर्फ कीमत बढ़ाने का बहाना है या जमीन बचाने की जरूरी पहल? इसे समझना होगा।

क्या है पूरा प्रस्ताव?

सर्वे में साफ किया गया है कि यूरिया की Retail Price में इजाफा होगा, लेकिन साथ ही सब्सिडी का नया नियम भी लागू होगा। अभी तक कंपनियां उत्पादन लागत का 50 फीसदी ही आपसे वसूलती हैं, बाकी सरकार सीधे कंपनियों को देती है।

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अब यह सिस्टम बदलकर Direct Benefit Transfer जैसा हो जाएगा। आप बाजार मूल्य पर यूरिया खरीदेंगे और सरकार आधी राशि सीधे आपके खाते में भेजेगी। बिल्कुल PM-Kisan योजना की तरह। यह पैसा प्रति एकड़ के आधार पर मिलेगा, यानी जितनी जमीन, उतनी सहायता।

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जमीन बचाना है तो यूरिया घटाना होगा?

यह बदलाव सिर्फ पैसों का खेल नहीं है, बल्कि तीन दशक पुरानी गड़बड़ी को सुधारने की कोशिश है। आर्थिक समीक्षा के मुताबिक, भारतीय किसानों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला नाइट्रोजन-फॉस्फोरस-पोटेशियम (NPK Ratio) का अनुपात साल 2009-10 में 4:3.2:1 था, जो अब 2023-24 में बिगड़कर 10.9:4.1:1 हो गया है।

यानी नाइट्रोजन (यूरिया) की अत्यधिक खपत, फॉस्फोरस और पोटाश की तुलना में कई गुना ज्यादा हो गई है। जबकि कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक अधिकांश फसलों के लिए 4:2:1 का अनुपात सही है। यही मिट्टी की सेहत (Soil Health) बिगाड़ रहा है।

क्या हो रहा जमीन को?

समीक्षा में खुलासा है कि इस Nutrient Imbalance से मिट्टी का कार्बनिक पदार्थ कम हो रहा है। सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी तेज हो रही है, जमीन की संरचना कमजोर पड़ रही है और भूजल में नाइट्रेट का रिसाव बढ़ रहा है।

हालत यह है कि कई सिंचित इलाकों में उर्वरक डालने के बावजूद उपज नहीं बढ़ रही, बल्कि स्थिर हो गई है या घट रही है। पहले जितने में फसल होती थी, अब उससे ज्यादा खाद डालनी पड़ रही है। यह Input Cost बढ़ाने वाला खतरनाक चक्र है।

डिजिटल निगरानी से होगा कंट्रोल

सरकार का दावा है कि Digital Agriculture Infrastructure और आधार-लिंक्ड उर्वरक बिक्री से इसे ठीक किया जा सकता है। Integrated Fertilizer Management System के जरिए रियल टाइम में निगरानी होगी। साफ किया गया है कि मकसद यूरिया के इस्तेमाल को कम करना नहीं है, बल्कि उसे फसल की जरूरत और मिट्टी की हालत के हिसाब से ढालना है। सही पोषक तत्वों का संतुलन उपज बढ़ाएगा और प्रति टन अनाज के लिए कम खाद की जरूरत पड़ेगी।

पुराने उपाय क्यों नाकाम रहे?

सरकार पहले भी न्यूट्रिएंट-आधारित मूल्य निर्धारण, नीम-कोटेड यूरिया और बिक्री केंद्रों पर आधार-सत्यापन जैसे कदम उठा चुकी है। लेकिन ये उपाय मुख्य रूप से Supply Side पर काम करते रहे, मांग वाले पक्ष पर नहीं। अब सीधे किसान के खाते में पैसे भेजकर उसे जिम्मेदार बनाने की कोशिश है।

किसानों के सवाल और उनके जवाब

1. अभी यूरिया का दाम क्या है और कब से है ?

वर्तमान में 45 किलो का बैग 242 रुपये में मिलता है। यह दर मार्च 2018 से लागू है, यानी करीब 8 साल से कीमतें जमी हुई हैं।

2. नई सब्सिडी व्यवस्था कैसे काम करेगी?

आप बाजार मूल्य पर यूरिया खरीदेंगे और सरकार सब्सिडी की राशि सीधे आपके बैंक खाते में [Direct Transfer] करेगी। यह राशि प्रति एकड़ के आधार पर तय होगी, कंपनियों को सीधे पैसा नहीं जाएगा।

3. NPK असंतुलन से क्या नुकसान है?

नाइट्रोजन (यूरिया) का अत्यधिक इस्तेमाल मिट्टी के कार्बनिक पदार्थ को खत्म कर रहा है। सूक्ष्म पोषक तत्व कम हो रहे हैं और भूजल प्रदूषित हो रहा है। इससे फसल की पैदावार भी घट रही है।

4. यह नया सिस्टम कब से लागू होगा?

आर्थिक समीक्षा 2025-26 के लिए यह प्रस्ताव कर रही है। अभी यह केवल सिफारिश है, पूरी लागू होने की तारीख का ऐलान बजट या अधिसूचना के बाद होगा।

5. क्या किसानों को कोई नया रजिस्ट्रेशन कराना होगा?

जानकारी के मुताबिक, Aadhaar Linked बैंक खाते और डिजिटल बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल होगा। यदि आपका खाता पहले से PM-Kisan में जुड़ा है तो संभवतः वही खाता काम आए, लेकिन अंतिम दिशा-निर्देश आने पर स्पष्टता होगी।

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जगत पाल पिछले 8 वर्षों से एक पेशेवर ब्लॉगर हैं। वे शिक्षा, ऑटो, कृषि समाचार, मंडी भाव, गैजेट्स और बिजनेस जैसे विषयों पर विशेषज्ञता रखते हैं। वर्तमान में वे news.emandirates.com के संपादक और प्रमुख लेखक हैं, जहाँ वे भरोसेमंद और जानकारीपूर्ण कंटेंट प्रदान करते हैं।