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Chana Bhav Report: सीमा पर तनाव से चना दाल के दामों में उछाल, क्या युद्धविराम के बाद अब कीमतें फिर गिरेगी? जानें

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Chana Bhav Report 11 May 2025: दिल्ली और राजस्थान की मंडियों में इस सप्ताह चना के दामों में उछाल देखने को मिला । मंडियों से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार सोमवार को जहाँ दिल्ली एमपी लाइन में चना का भाव 5700 से 5725 रुपये प्रति क्विंटल के बीच खुले, जो कल यानी शनिवार को 5950 से 5975 रुपये पर बंद हुआ राजस्थान की बात करें तो सोमवार को चना 5800-5825 रुपये पर खुला था , जो सप्ताहांत में 6000-6025 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ ।अगर पूरे हफ्ते का रुझान देखें, तो चना ने 200 रुपये प्रति क्विंटल की मज़बूत छलांग लगाई ।

चना भाव में तेजी का कारण क्या है?

इस सप्ताह चना के बाज़ार में सकारात्मकता की मुख्य वजह रही कमजोर बिकवाली और चना दाल-बेसन की मांग में अप्रत्याशित उछाल। जब पाकिस्तान-भारत सीमा पर तनाव बढ़ा, तो उपभोक्ताओं और थोक विक्रेताओं दोनों ने स्टॉक बढ़ाना शुरू कर दिया। इससे मांग अचानक बढ़ी और भाव को सहारा मिला।

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हालांकि शनिवार की शाम जब सीजफायर (Ceasefire) की खबरें आईं, तब बाज़ार ने कुछ राहत की साँस ली और थोड़ी मुनाफावसूली देखने को मिली। लेकिन फिर भी, कीमतों में गिरावट की बजाय स्थिरता देखने को मिली ।

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मंडियों में आवक घटी, स्टॉकिस्ट अभी भी सतर्क

देशभर की प्रमुख मंडियों में इस समय चना की आवक काफी कमजोर है। वजह साफ है—सीजन के दौरान उपज का एक बड़ा हिस्सा स्टॉकिस्टों के पास चला गया है, और वे फिलहाल बेचने के मूड में नहीं हैं।

साथ ही, मानसून की दस्तक के साथ ही चना दाल की खपत में इज़ाफे की संभावना जताई जा रही है। जून से दिसंबर तक की अवधि में बेसन और चना दाल की मांग पारंपरिक रूप से बढ़ती है, और यही कारण है कि व्यापारी कीमतों में बड़ी गिरावट की आशंका नहीं जता रहे हैं।

वैश्विक संकेत

दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलिया में जून-जुलाई के दौरान चना की बोआई का समय होता है। इस बार वहाँ बोआई में इज़ाफा देखने को मिल रहा है। लेकिन भारत सरकार ने चना आयात पर 10% का शुल्क लगा रखा है, जिससे विदेशी आपूर्ति का प्रभाव घरेलू बाज़ार पर सीमित ही रहने वाला है।

चना भाव: क्या आगे भी देखेगी तेजी ?

सप्ताह के दौरान दिल्ली चना ने 5950 रुपये का अहम रेजिस्टेंस ज़रूर तोड़ा, लेकिन सप्ताहांत तक वह 5975 रुपये पर बंद हुआ। यानी अभी वह पूरी तरह उस स्तर पर टिक नहीं पाया है।

आने वाले दिनों में चना के दामों में हल्का उतार-चढ़ाव ज़रूर रहेगा, लेकिन दीर्घकालिक नजरिए से बाज़ार में स्थिरता और सकारात्मकता की उम्मीद की जा रही है। मांग में वृद्धि, कमजोर बिकवाली और सीमित आवक—ये तीन कारक मिलकर चना के लिए एक मज़बूत ज़मीन तैयार कर रहे हैं। किसानों और व्यापारियों दोनों के लिए ‘वेट एंड वॉच’ का समय है।

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Disclaimer- यहां दी गई तेजी मंदी की रिपोर्ट मौजूदा बाज़ार भाव और ताजा घटनाक्रम के आधार पर दी गई है । किसी भी प्रकार का व्यापार अपने विवेक से करें। धन्यवाद

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जगत पाल पिछले 8 वर्षों से एक पेशेवर ब्लॉगर हैं। वे शिक्षा, ऑटो, कृषि समाचार, मंडी भाव, गैजेट्स और बिजनेस जैसे विषयों पर विशेषज्ञता रखते हैं। वर्तमान में वे news.emandirates.com के संपादक और प्रमुख लेखक हैं, जहाँ वे भरोसेमंद और जानकारीपूर्ण कंटेंट प्रदान करते हैं।