RBI Repo Rate Cut : क्या आप भी उन लाखों भारतीयों में शामिल हैं जो हर महीने होम लोन या कार लोन की EMI चुकाते-चुकाते परेशान हैं? अगर हां, तो आरबीआई का आज का ऐलान आपके लिए खुशखबरी लेकर आया है! भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने आज बुधवार 9 अप्रैल को अपनी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट में 0.25% की कटौती का ऐतिहासिक फैसला लिया है। इस कदम का सीधा असर आपकी EMI पर दिखेगा, लेकिन क्या यह भारतीय अर्थव्यवस्था को अमेरिकी टैरिफ के झटकों से उबार पाएगा? आइए, विस्तार से समझते हैं।
रेपो रेट कटौती का मतलब: आसान भाषा में समझें
रेपो रेट वह ‘कीमत’ है जिस पर आरबीआई देश के बैंकों को कर्ज देता है। जब यह दर घटती है, तो बैंकों के लिए कर्ज लेना सस्ता हो जाता है। नतीजा? बैंक आम लोगों को होम लोन, कार लोन या बिज़नेस लोन कम ब्याज दर पर देते हैं। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के मुताबिक, “MPC ने सर्वसम्मति से रेपो रेट 6.25% से घटाकर 6% करने का फैसला लिया है। यह कदम वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच घरेलू विकास को गति देगा।”
ईएमआई पर कब तक दिखेगा असर?
हालांकि रेपो रेट में कटौती का मतलब यह नहीं कि कल से ही आपकी ईएमआई आधी हो जाएगी। दरअसल, बैंक इस दर में कटौती का फायदा ग्राहकों को कितनी तेजी से देते हैं, यह उनकी व्यावसायिक रणनीति पर निर्भर करता है। बैंकिंग विशेषज्ञ राजीव मेहता कहते हैं, “पिछले 5 साल के डेटा को देखें तो 80% मामलों में बैंक 2-3 महीने के भीतर रेट कट का लाभ पास कर देते हैं।” इस बार भी होम लोन और कार लोन लेने वालों को जून-जुलाई तक राहत मिलने की उम्मीद है।
फरवरी के बाद दूसरी बार कटौती: क्या है RBI की रणनीति?
यह कोई एकमुश्त फैसला नहीं है। फरवरी में भी आरबीआई ने रेपो रेट में 0.25% की कटौती की थी, जिसके बाद यह दर 6.25% पर पहुँच गई थी। इससे पहले, मई 2020 में भी दरों में ऐसी ही छूट दी गई थी। दिलचस्प बात यह है कि फरवरी 2023 में आरबीआई ने रेपो रेट बढ़ाकर 6.5% कर दिया था, जो महंगाई को कंट्रोल करने की कोशिश थी। यानी, बैंक दरों को लेकर लगातार “ट्रायल एंड एरर” मोड में है।
अमेरिकी टैरिफ और जीडीपी अनुमान: क्यों डरी हुई है अर्थव्यवस्था?
आरबीआई की इस कटौती के पीछे एक बड़ा कारण अमेरिका का हालिया फैसला है। पिछले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारतीय आयातों पर 26% का भारी-भरकम शुल्क लगाने की घोषणा की, जो 9 अप्रैल से लागू होगा। इसके चलते आरबीआई ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.7% से घटाकर 6.5% कर दिया है। गवर्नर मल्होत्रा ने साफ किया कि “वैश्विक अनिश्चितताओं और व्यापारिक तनावों” ने यह कदम जरूरी बना दिया।
महंगाई पर क्या होगा असर? आरबीआई ने दिया यह अनुमान
चिंता की बात यह है कि क्या रेपो रेट कटौती से महंगाई बढ़ेगी? आरबीआई के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 में महंगाई दर 4% के आसपास रहने का अनुमान है। फरवरी में यह दर 4.2% रही, जो खाद्य पदार्थों की कीमतों में स्थिरता के कारण संभव हुआ। गवर्नर ने कहा, “खाद्य मुद्रास्फीति अब सकारात्मक दिशा में है, लेकिन हमें ग्लोबल मार्केट के झटकों पर नजर बनाए रखनी होगी।”